भारत-ऑस्ट्रेलिया की नई टेक साझेदारी, साइबर सुरक्षा से लेकर रक्षा अनुसंधान तक, देखें क्या है लेटेस्ट अपडेट
नई साझेदारी के तहत भारत और ऑस्ट्रेलिया सुरक्षित और भरोसेमंद टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन विकसित करेंगे। दोनों देश सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर संयुक्त शोध करेंगे, महत्वपूर्ण खनिजों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।
PM Modi's Australia Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने ऑस्ट्रेलिया-इंडिया पार्टनरशिप ऑन साइबर, क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज एंड सप्लाई चेन्स (PACTS) की शुरुआत की। यह नई साझेदारी दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा, आधुनिक तकनीक, भरोसेमंद सप्लाई चेन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और रक्षा अनुसंधान जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेगी।
यह समझौता 2020 में बने पुराने साइबर सहयोग ढांचे की जगह लेगा और बदलती वैश्विक चुनौतियों के बीच दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देगा। इसका मकसद राष्ट्रीय सुरक्षा बढ़ाने, आर्थिक विकास को गति देने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता कायम रखना है।
सप्लाई चेन होगी ज्यादा सुरक्षित और मजबूत
नई साझेदारी के तहत भारत और ऑस्ट्रेलिया सुरक्षित और भरोसेमंद टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन विकसित करेंगे। दोनों देश सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर संयुक्त शोध करेंगे, महत्वपूर्ण खनिजों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे और अंडरसी केबल सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए भी मिलकर काम करेंगे।
AI और अंतरिक्ष तकनीक में बढ़ेगा सहयोग
PACTS के दूसरे स्तंभ के तहत दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अंतरिक्ष, दूरसंचार, बायोटेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैटेरियल्स जैसे भविष्य की तकनीकों पर संयुक्त शोध और निवेश को बढ़ावा देंगे। साथ ही सुरक्षित और विश्वसनीय AI के लिए वैश्विक मानक विकसित करने में भी मिलकर काम करेंगे।
साइबर अपराध से निपटने के लिए साझा रणनीति
भारत और ऑस्ट्रेलिया साइबर हमलों और साइबर अपराधों से निपटने के लिए अपने सहयोग को और मजबूत करेंगे। इसके तहत डेटा सुरक्षा, महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे की सुरक्षा, साइबर स्किल डेवलपमेंट और सरकारी एजेंसियों व उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों देश साइबर विशेषज्ञ तैयार करने के लिए एक स्किल इन्क्यूबेटर भी स्थापित करेंगे।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का होगा विस्तार
दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगे। स्वास्थ्य, शिक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, कनेक्टिविटी, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में डिजिटल समाधान विकसित किए जाएंगे। भारत के सफल डिजिटल मॉडल को अन्य साझेदार देशों तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षण और पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किए जाएंगे।
रक्षा अनुसंधान और स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों का सहयोग नई ऊंचाई पर पहुंचेगा। भारत के DRDO और ऑस्ट्रेलिया के Defence Science and Technology Group संयुक्त रिसर्च करेंगे। इसके अलावा रक्षा स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा और समुद्री निगरानी, एडवांस्ड मैटेरियल्स समेत कई अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों पर साथ मिलकर काम किया जाएगा।
हर साल होगी समीक्षा, तय होंगे नए टारगेट
इस साझेदारी की निगरानी दोनों देशों के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी करेंगे। हर साल एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित होगी, जिसमें अब तक की प्रगति की समीक्षा की जाएगी, नए साइबर और तकनीकी खतरों का आकलन होगा और भविष्य के संयुक्त प्रोजेक्ट्स पर फैसला लिया जाएगा।
भारत और ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि PACTS केवल एक समझौता नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों का मिलकर सामना करने की साझा रणनीति है। इससे दोनों देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी, डिजिटल इकोसिस्टम अधिक भरोसेमंद बनेगा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता व सहयोग को नई गति मिलेगी।
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