अब UPI पेमेंट पर कितना लगेगा शुल्क ? लोकसभा में पास हुआ संशोधित टैक्स बिल
यदि आप भी यूपीआई पेमेंट करते हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत ही उपयोगी है। क्योंकि, लोकसभा में यूपीआई से जुड़ा संशोधित बिल टैक्स बिना किसी विरोध के पास हो गया है।
यदि आप यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस(UPI) से पेमेंट करते हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत ही उपयोगी रहने वाला है। क्योंकि, टैक्स संबंधी नियमों में संशोधन को लेकर बिल लोकसभा में पास कर दिया गया है। ऐसे में अब यूपीआई पेमेंट पर शुल्क लग सकता है, हालांकि शुल्क से ट्रांजेक्शन से जुड़ी 71 फीसदी राशि फ्री रह सकती है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यहां बिल में इस बात का जिक्र नहीं किया गया है कि यूपीआई से जुड़ी कितनी पेमेंट पर शुल्क लगाया जाएगा। यह अधिकार नेशनल पेमेंट कार्पोरेशन ऑफ इंडिया(NPCI) के पास है। एनपीसीआई ही इस मामले में फैसला लेगा।
इस ट्रांजेक्शन पर लग सकता है शुल्क
जागरण डॉट कॉम के मुताबकि, यदि कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को पेमेंट करता है, तो शुल्क नहीं लगेगा। हालांकि, यदि व्यक्ति किसी मर्चेंट या फिर कोई मर्चेंट किसी अन्य मर्चेंट को पेमेंट करता है, तो इस पर शुल्क लग सकता है। शुल्क दर कितनी लगेगी, अभी इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन यह माना जा रहा है कि बहुत ही कम ट्रांजेक्शन शुल्क लग सकता है।
बीते वित्त वर्ष में 314 लाख करोड़ की हुई पेमेंट
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों पर गौर करें, तो वित्त वर्ष 2025-26 में कुल यूपीआई के माध्यम से 24,161.69 करोड़ ट्रांजेक्शन हुई हैं। इनसे कुल 314 लाख करोड़ रुपये की पेमेंट की गई है, जिनमें 71 फीसदी राशि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच हुई है। वहीं, 29 फीसदी राशि व्यक्ति और मर्चेंट के बीच हुई है। ऐसे में 71 फीसदी राशि पर शुल्क नहीं लगाने की बात कही जा रही है।
2000 से अधिक की राशि पर लग सकता है शुल्क
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों पर गौर करें, तो व्यक्ति और मर्चेंट के बीच में ट्रांजेक्शन में 2000 रुपये से अधिक होने वाली पेमेंट सिर्फ 4 फीसदी रही है। वहीं, एक व्यक्ति से मर्चेंट के बीच 59 फीसदी ट्रांजेक्शन 0-500 रुपये के रहे हैं। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि 2000 रुपये से अधिक की राशि पर शुल्क लगाया जा सकता है। वहीं, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले ट्रांजेक्शन में 2000 रुपये से अधिक की पेमेंट 20 फीसदी रही है। ऐसे में इस वर्ग को शुल्क मुक्त रखा जा सकता है।
सालाना आता है इतना खर्च
वर्तमान में 700 से अधिक बैंक व वित्तीय संस्था यूपीआई सेवा प्रदान करते हैं। जागरण डॉट कॉम के मुताबिक, बैंकों को यूपीआई सेवा का संचालन करने में सालाना तौर पर 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
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