उत्तर प्रदेश देश का ऐसा राज्य बन चुका है जहां सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे हैं। यहां 13–15 एक्सप्रेसवे (संचालित और निर्माणाधीन) मौजूद हैं, जिनकी कुल लंबाई 1500 किमी से अधिक है। यह नेटवर्क भारत के कुल एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा कवर करता है। राज्य में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसे बड़े मार्ग शामिल हैं। ये एक्सप्रेसवे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों को तेज और बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं।
NCR से मजबूत कनेक्टिविटी
बता दें कि अभी हाल ही में पीएम मोदी ने दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया जो दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से होकर गुजरता है, वहीं यमुना एक्सप्रेसवे दिल्ली से आगरा को जोड़ता है, जबकि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का कुछ हिस्सा भी उत्तर प्रदेश को जोड़ता है। इससे एनसीआर क्षेत्र के साथ राज्य की कनेक्टिविटी और मजबूत हुई है। बता दें कि उत्तर प्रदेश में ही देश का सबसे लंबा और चौड़ा एक्सप्रेसवे भी है।
इकलौता राज्य जहां है सर्वाधिक एक्सप्रेसवे
उत्तर प्रदेश में 3,200 किलोमीटर से अधिक का एक्सप्रेसवे नेटवर्क तेजी से विकसित किया जा रहा है, जिसमें गंगा एक्सप्रेसवे (लगभग 594 किमी), पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख मार्ग शामिल हैं। यह देश का पहला राज्य है जहाँ 2,000 किमी से अधिक एक्सप्रेसवे नेटवर्क संचालित हो चुका है। यह नेटवर्क न केवल बड़े शहरों को जोड़ रहा है, बल्कि बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे दूरदराज क्षेत्रों को भी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी देकर विकास की रफ्तार तेज कर रहा है।
आगे क्यों है उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी, रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ इसे आगे रखता है। यह राज्य दिल्ली-मुंबई-कोलकाता कॉरिडोर के बीच स्थित होने के कारण एक्सप्रेसवे विकास का केंद्र बना हुआ है।
विकास और निवेश में भूमिका
एक्सप्रेसवे नेटवर्क उद्योग, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है। अयोध्या, वाराणसी और आगरा जैसे धार्मिक व पर्यटन स्थलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से निवेश और रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।