एशिया का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे, भारत के इस राज्य में है मौजूद

Last Updated: Apr 16, 2026, 18:10 IST

दुनिया में बहुत-से एक्सप्रेसवे ऐसे हैं, जो कि अपनी लंबाई के कारण जाने जाते हैं। इनमें से एक एक्सप्रेसवे एक ऐसा भी है, जो कि अपनी लंबाई के लिए पूरे एशिया में जाना जाता है। यह एक्सप्रेसवे भारत में मौजूद है, जो कि यूपी के कई जिलों को आपस में जोड़ता है।

सबसे लंबा एक्सप्रेसवे
सबसे लंबा एक्सप्रेसवे

एशिया में आपने बहुत-से छोटे-बड़े एक्सप्रेसवे के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, यदि एशिया के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे के बारे में बात करें, तो यह पूर्वांचल एक्सप्रेसवे है। यह एक्सप्रेसवे 6 लेन वाला एक्सप्रेसवे है, जिसे भविष्य में 8 लेन का करने की भी योजना है। वर्तमान में यह एक्सप्रेसवे चालू है और यूपी के अलग-अलग जिलों को आपसे में जोड़ने का काम करता है।

कितना लंबा है एक्सप्रेसवे

एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई की बात करें, तो यह 340.8 किलोमीटर है। वर्तमान में यह एक 6 लेन वाला एक्सप्रेसवे है। 

कितनी लागत में हुआ था निर्माण

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण भूमि अधिग्रहण सहित 22, 494 करोड़ रुपये में किया गया था। वहीं, इसका उद्घाटन नवंबर, 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था।

यूपी के किन जिलों को जोड़ता है पूर्वांचल एक्सप्रेसवे

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लखनऊ को गाजीपुर से जोड़ने का काम करता है। क्योंकि, यह पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ता है, ऐसे में इसे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे कहा जाता है। यह एक्सप्रेसवे यूपी के इन जिलों को आपस में जोड़ने का काम करता हैः

  1. लखनऊ

  2. बाराबंकी

  3. अमेठी

  4. सुल्तानपुर

  5. अयोध्या

  6. अंबेडकर नगर

  7. आजमगढ़

  8. मऊ

  9. गाजीपुर

दिल्ली को बिहार से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण 

यह एक्सप्रेसवे दिल्ली को बिहार से जोड़ने के लिए भी महत्त्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि, यहां तक पुहंचने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे से होते हुए लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल कर गाजीपुर और आगे बिहार तक पहुंचा जा सकता है।

वायुसेना की हवाई पट्टी के लिए पहचान

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे अपनी 3.2 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप के लिए जाना जाता है। यह सुल्तानपुर जिले के पास स्थित है। इस स्ट्रिप का निर्माण भारतीय वायु सेना के सुखोई और मिराज जैसे विमानों की आपातकालीन लैंडिंग के लिए किया गया है। यदि भविष्य में कभी युद्ध की स्थिति में हवाई अड्डे क्षतिग्रस्त होते हैं, तो लड़ाकू विमानों को यहां उतारा जा सकता है।

समय की होती है बचत

लखनऊ से गाजीपुर जाने में लोगों को पहले 7 से 8 घंटे का समय लग जाता था। हालांकि, अब यह समय घटकर 3 से 4 घंटे रह गया है। वहीं, सरकार इसके किनारे औद्योगिक गलियारा भी विकसित कर रही है, जिससे यहां रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior content writer

A seasoned journalist with over 7 years of extensive experience across both print and digital media, skilled in crafting engaging and informative multimedia content for diverse audiences. His expertise lies in transforming complex ideas into clear, compelling narratives that resonate with readers across various platforms. At Jagran Josh, Kishan works as a Senior Content Writer (Multimedia Producer) in the GK section. He writes on national and international topics from a GK perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com

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First Published: Apr 16, 2026, 18:10 IST

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