कानून एवं व्यवस्था के लिए पुलिस सबसे पहले जिम्मेदार होती है। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की अपनी पुलिस है, जो कि संबंधित क्षेत्र में शांति और न्याय व्यवस्था को बनाए रखने में मदद करती है। पुलिस की खाकी वर्दी सुरक्षा का अहसास दिलाने के लिए है। इस वर्दी को बहुत ही सोच-समझकर डिजाइन किया गया है।
आपने कभी गौर किया होगा कि पुलिस की वर्दी में कंधे की तरफ एक डोरी बंधी हुई होती है। यह डोरी कंधे से होते हुए पुलिसकर्मी की जेब तक पहुंचती है। खास बात यह है कि वर्दी का यह पैटर्न हमें एक सिपाही से लेकर IPS अधिकारी तक की वर्दी में देखने को मिलता है। हालांकि, क्या आपने सोचा है कि आखिर यह डोरी क्यों बंधी हुई होती है। इस लेख में हम इस बारे में जानेंगे।
किसने डिजाइन की थी पुलिस की वर्दी
भारतीय पुलिस की खाकी वर्दी को सर हैरी लम्सडेन ने 1847 में डिजाइन किया था। उन्होंने भारतीय ब्रिटिश सेना में रहते हुए इस वर्दी का रंग खाकी कर पहना था, जिसके बाद इसे आधिकारिक रूप से मान्यता मिली। इससे पहले पुलिस की वर्दी का रंग सफेद हुआ करता था, जो कि जल्दी गंदा हो जाता था। ऐसे में हैरी ने चाय की पत्ती व अन्य रंग मिलाकर इसे खाकी रंग में बदला, जिससे यह जल्दी गंदी नहीं होती थी।
पुलिस की वर्दी में क्यों लगी होती होती है डोरी
पुलिस की वर्दी में लगी डोरी को Lanyard कहा जाता है। इसके वर्दी में लगे होने के मुख्य कारण इस प्रकार हैंः
सीटी बजाने के लिए
पुलिस की वर्दी में लगी यह डोरी पुलिसकर्मियों की सीटी रखने के लिए होती है। यह डोरी कंधे से पॉकेट तक जाती है। ऐसे में पुलिसकर्मियों को बार-बार अपनी सीटी ढूंढने न पड़े और वे इसे इस डोरी में लगा सके, इसके लिए यह डोरी दी गई होती है।
आपातकाल के समय उपयोगी
कई बार पुलिसकर्मियों को आपात स्थिति में अधिक भीड़-भाड को निर्देशित करने या फिर दौड़-भाग के दौरान सीटी का उपयोग करना होता है। इन सभी स्थितियों में सीटी गिरे नहीं, इसके लिए डोरी उपयोगी होती है।
अनुशासन और परंपरा का प्रतीक
पुलिसकर्मियों की वर्दी में लगी डोरी एक प्रकार की परंपरा और अनुशासन को दर्शाती है। यह वजह है कि इसे एक सिपाही से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की वर्दी में भी लगाया जाता है।

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सेना की वर्दी से मिली है प्रेरणा
पुलिस की वर्दी में लगी डोरी की प्रेरणा सेना की वर्दी से ली गई है। क्योंकि, ब्रिटिश सेना के अधिकारी इस डोरी से रिवॉव्लर व अन्य हथियारों को बांधकर रखते थे, जिससे युद्ध के दौरान हथियार न गिरे। क्योंकि, कई बार सैनिकों और अधिकारियों को समुद्र और घने जंगलों में युद्ध करना पड़ता था, ऐसे में यहां हथियार गिरने पर दोबारा मिलना मुश्किल होता था।
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