भारत को विविधताओं का देश कहा जाता है। यहां प्रत्येक शहर की अपनी पहचान है। इस कड़ी में गुजरात का जामनगर शहर ऐसा है, जिसे ‘एशिया का पावरहाउस’ भी कहा जाता है। यहां कई वर्षों से तेल व इससे जुड़े उत्पाद तैयार किये जाते रहे हैं, जिनकी न सिर्फ भारत में आपूर्ति में की जाती है, बल्कि विदेशों में भी इन उत्पादों को भेजा जाता है।
जामनगर को पावरहाउस कहने के पीछे 5 प्रमुख कारण
जामनगर को पावरहाउस कहने के पीछे अलग-अलग कारण हैं, जो कि नीचे दिए गए हैंः
जामनगर में मौजूद है सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी
जामनगर में भार की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी मौजूद है। यह रिफाइनरी 12 लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल को रिफाइन कर पेट्रोल, डीजल और पेट्रोल से जुड़े अन्य उत्पाद बनाती है। यह रिफाइनरी अपने आप में एक बड़ा क्षेत्र है।
एशिया, यूरोप और अमेरिका में तेल की आपूर्ति
जामनगर तेल रिफाइनरी से न सिर्फ भारत में तेल की आपूर्ति होती है, बल्कि एशिया, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में भी तेल की सप्लाई की जाती है। यदि यहां तेल की रिफाइनिंग पर असर पड़ता है, तो इससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों पर असर पड़ता है।
सबसे खराब तेल को भी रिफाइन करने की क्षमता
जामनगर की तेल रिफाइनरी में ‘नेल्सन काम्पलेक्सिटी इंडेक्स की अच्छी रेटिंग है। इसका मतलब हुआ कै यह सबसे खराब तेल को भी रिफाइन कर पेट्रोल और डीजल बना सकती है, जबकि बाकी रिफाइनरी सिर्फ अच्छे तेल को ही रिफाइन कर सकती हैं।
उत्पादन लागत पर पड़ता है प्रभाव
जामनगर रिफाइनरी में एक ही जगह पर रिफाइनरी, बंदरगाह और बिजली संयंत्र हैं। ऐसे में यहां एक ही जगह पर ये जरूरी स्थान होने से उत्पादन लागत पर कम प्रभाव पड़ता है। यही वजह है कि यहां के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाते हैं।
विदेशी मुद्रा कमाने का स्रोत
जामनगर पेट्रोल के माध्यम से विदेश मुद्रा कमाने का एकल स्रोत है। क्योंकि, यहां से पेट्रोल को विदेशों में निर्यात किया जाता है। इसके लिए यहां एक स्पेशल इकोनॉमिक जोन भी बनाया गया है।
भविष्य ऊर्जा पर भी हो रहा काम
जामनगर में अब सिर्फ तेल रिफाइनिंग नहीं हो रही है, बल्कि यह आगे बढ़कर सोलर एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और फ्यूल सेल्स पर पहुंच गया है। यहां अब ग्रीन एनर्जी की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं, जिससे पारंपरिक ऊर्जा के स्रोत को भविष्य के ऊर्जों के स्रोतों से बदला जा सके।
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