उत्तर प्रदेश को “एक्सप्रेसवे किंग” या “एक्सप्रेसवे प्रदेश” के तौर पर जाना जाता है, इसकी वजह है राज्य में बड़ी संख्या में एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट का होना चाहे वे चालू हों, निर्माणाधीन हों या प्रस्तावित। देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क में यूपी की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा मानी जाती है और आने वाले समय में यह और बढ़ने वाली है।
विशाल नेटवर्क और वर्तमान स्थिति
साल 2026 तक उत्तर प्रदेश में 1,500 किमी से ज्यादा एक्सप्रेसवे चालू हैं। करीब 1,600 किमी नेटवर्क पूरी तरह ऑपरेशनल है, जबकि कुछ निर्माणाधीन और 700 किमी प्रस्तावित हैं। कुल मिलाकर राज्य जल्द ही 3,000 किमी एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में बढ़ रहा है, जो इसे देश में टॉप स्थान पर रखता है।
राज्य में कौन से एक्सप्रेसवे
| एक्सप्रेसवे का नाम | लंबाई (किमी) |
| पूर्वांचल एक्सप्रेसवे | 341 |
| आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे | 302 |
| गंगा एक्सप्रेसवे | 594 |
| बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे | 296 |
| यमुना एक्सप्रेसवे | 165 |
| गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे | 91 |
राज्य में कौन से है प्रमुख एक्सप्रेसवे
राज्य में कई बड़े एक्सप्रेसवे पहले से चालू हैं, जैसे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (341 किमी), आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे (302 किमी), गंगा एक्सप्रेसवे (594 किमी), बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (296 किमी) और यमुना एक्सप्रेसवे (165 किमी)। इसके अलावा गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे भी महत्वपूर्ण कड़ी है। वहीं लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं और जल्द ही नेटवर्क को और मजबूत करेंगी।
लॉजिस्टिक्स, रक्षा गलियारों और निवेश को बढ़ावा
इन एक्सप्रेसवे परियोजनाओं ने राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। यात्रा समय में भारी कमी आई है, जहां पहले 10–12 घंटे लगते थे, अब वही दूरी 6–8 घंटे में तय हो रही है। इससे लॉजिस्टिक्स, उद्योग, रक्षा गलियारों और निवेश को बढ़ावा मिला है। साथ ही, ODOP (One District One Product) जैसे स्थानीय उद्योगों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिल रही है और जेवर एयरपोर्ट जैसी परियोजनाओं से कनेक्टिविटी और मजबूत हुई है।
क्या है आगे की योजना
उत्तर प्रदेश सरकार आने वाले वर्षों में एक्सप्रेसवे नेटवर्क को 4,000 किमी से अधिक तक ले जाने की योजना बना रही है। गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे (750 किमी) समेत कई नई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। करीब ₹50,000 करोड़ के निवेश से 866 किमी लंबी सड़कों का निर्माण 50 से अधिक जिलों में किया जाएगा। यह विस्तार उत्तर प्रदेश को लंबे समय तक देश का “एक्सप्रेसवे किंग” बनाए रखने में मदद करेगा।