भारत के लोकतंत्र में अविश्वास प्रस्ताव(No-Confidence Motion) एक शक्तिशाली और महत्त्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। यह संसद के निचले सदन यानि कि लोकसभा में ही पेश किया जाता है। इसके तहत विपक्ष दल दिखाता है कि मौजूदा सरकार के पास शासन करने का अधिकार यानि कि बहुमत बचा है नहीं।
इससे विपक्ष दल अपनी ताकत का भी अहसास करवाता है, जिससे पता चल सके कि विपक्ष कितना मजबूत है। इस लेख में हम अविश्वास प्रस्ताव से जुड़े महत्त्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जानेंगे।
क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव
अविश्विास प्रस्ताव को लोकसभा में विपक्ष द्वारा पेश किया जाता है। इसे यदि आसान भाषा में समझें, तो इस प्रस्ताव के जरिये विपक्ष द्वारा यह संदेश दिया जाता है कि उसे सरकार पर भरोसा नहीं रहा है। यदि यह पास हो जाए, तो मौजूदा सरकार के मंत्रीपरिषद् को इस्तीफा देना पड़ता है। ऐसे में सरकार गिर जाती है।
कौन ला सकता है अविश्वास प्रस्ताव
अविश्वास प्रस्ताव को लोकसभा में विपक्ष का कोई भी नेता पेश कर सकता है। ध्यान रहें कि यह प्रस्ताव कभी भी राज्यसभा में पेश नहीं किया जाता है। प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए कम से कम 50 फीसदी सांसदों का लिखित समर्थन चाहिए होता है। यदि लोकसभा अध्यक्ष प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते हैं, तो अगले 10 दिनों के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा होना अनिवार्य है और अंत में वोटिंग होती है।
अविश्वास प्रस्ताव के क्या रहते हैं परिणाम
अविश्वास प्रस्ताव के दौरान यदि वोटिंग में सरकार के पक्ष में अधिक वोट होते हैं, तो सरकार सुरक्षित रहती है। वहीं, यदि एक भी वोट विपक्ष में अधिक हुआ, तो प्रधानमंत्री समेत पूरे मंत्रिपरिषद् को तुरंत इस्तीफा देना होता है।

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विपक्ष क्यों लाता है अविश्वास प्रस्ताव
संसद में कई बार विपक्ष को पता होता है कि मौजूदा सरकार के पास बहुमत है और वे वोटिंग में भी नहीं जीतेंगे, इसके बावजूद भी विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाते हैं, क्योंकिः
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सरकार को महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब देने के लिए मजबूर करने के लिए
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जनता किसी एक और खास समस्या पर अधिक ध्यान दे सके
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यह दिखाने के लिए विपक्ष कितना मजबूत है। क्योंकि, इससे विपक्ष की शक्ति का प्रदर्शन का होता है।
कब आया सबसे अधिक बार अविश्वास प्रस्ताव
इंदिरा गांधी सरकार के समय सबसे अधिक 15 बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। वहीं, इससे पहले 1963 में जवाहर लाल नेहरू की सरकार में भी अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन यह प्रस्ताव फेल हो गया था। आपको यह भी बता दें कि 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार सिर्फ 1 वोट के कारण हार गई थी।
वहीं, मोरारजी देसाई की सरकार अविश्वास प्रस्ताव के कारण गिर गई थी। ऐसे में कह सकते हैं कि अविश्वास प्रस्ताव संसद का एक मजबूत हथियार होता है, जिससे मौजूदा सरकार को भी हिलाया जा सकता है।
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