India’s 100th Ramsar site: यूपी का सुरहा ताल बना 100वां रामसर साइट, किस जिले में है स्थित और क्या है खासियत? पढ़ें
India’s 100th Ramsar Site: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल- Surha Tal) को भारत का 100वां रामसर साइट घोषित किया गया है। यह आर्द्रभूमि प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की समृद्ध विविधता के लिए जानी जाती है। सुरहा ताल जैव विविधता संरक्षण, जल सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित सुरहा ताल अचानक विश्व पटल पर चर्चा का विषय बन गया क्योकि विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर भारत ने आर्द्रभूमि संरक्षण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की सूची में शामिल करते हुए देश का 100वां रामसर स्थल घोषित किया गया है। इस उपलब्धि की जानकारी और तस्वीरें प्रधानमंत्री पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि भारत की जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने सुरहा ताल को पक्षियों की समृद्ध विविधता वाला क्षेत्र बताते हुए कहा कि यहां बड़ी संख्या में प्रवासी और स्थानीय पक्षी आते हैं।
क्यों चर्चा में आया सुरहा ताल?
सुरहा ताल को रामसर स्थल का दर्जा मिलने के साथ भारत में अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की संख्या 100 हो गई है। रामसर सूची में शामिल होने का मतलब है कि इस आर्द्रभूमि के संरक्षण और इसके पारिस्थितिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे, जिस कारण विश्व पटल पर यह साइट चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्या है सुरहा ताल का इतिहास?
बलिया के बांसडीह क्षेत्र में स्थित सुरहा ताल का गठन वर्ष 1991 में 45 गांवों की लगभग 3,432.93 हेक्टेयर भूमि को एकीकृत कर किया गया था। बाद में वर्ष 2002 में इसका नाम बदलकर जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य रखा गया। यह क्षेत्र आज पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख पक्षी आवासों में गिना जाता है।
सुरहा ताल क्यों है खास
यह गंगा बेसिन की महत्वपूर्ण प्राकृतिक आर्द्रभूमियों में से एक है।
यहां हर साल बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं।
यह क्षेत्र जैव विविधता संरक्षण, मत्स्य पालन और जल संसाधन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।
स्थानीय पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में इसकी अहम भूमिका है।
आर्द्रभूमि होने के कारण यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी मदद करती है।
उत्तर प्रदेश में स्थित रामसर स्थल की लिस्ट (2026)
आप यहां उत्तर प्रदेश में स्थित सभी रामसर साइटो की पूरी लिस्ट देख सकते है-
| क्रमांक | रामसर स्थल | राज्य | वर्ष |
| 1 | जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) | उत्तर प्रदेश | 2026 |
| 2 | शेखा झील पक्षी अभयारण्य (Shekha Jheel Bird Sanctuary) | उत्तर प्रदेश | 2026 |
| 3 | अपर गंगा नदी (बृजघाट से नरौरा) (Upper Ganga River) | उत्तर प्रदेश | 2005 |
| 4 | पटना पक्षी अभयारण्य (Patna Bird Sanctuary) | उत्तर प्रदेश | 2026 |
| 5 | बखीरा वन्यजीव अभयारण्य (Bakhira WLS) | उत्तर प्रदेश | 2021 |
| 6 | हैदरपुर आर्द्रभूमि (Haiderpur Wetland) | उत्तर प्रदेश | 2021 |
| 7 | नवाबगंज पक्षी अभयारण्य (Nawabganj Bird Sanctuary) | उत्तर प्रदेश | 2019 |
| 8 | पार्वती-अरगा पक्षी अभयारण्य (Parvati Arga Bird Sanctuary) | उत्तर प्रदेश | 2019 |
| 9 | समन पक्षी अभयारण्य (Saman Bird Sanctuary) | उत्तर प्रदेश | 2019 |
| 10 | समासपुर पक्षी अभयारण्य (Samaspur Bird Sanctuary) | उत्तर प्रदेश | 2019 |
| 11 | सांडी पक्षी अभयारण्य (Sandi Bird Sanctuary) | उत्तर प्रदेश | 2019 |
| 12 | सरसई नावर झील (Sarsai Nawar Jheel) | उत्तर प्रदेश | 2019 |
| 13 | सूर सरोवर (कीठम झील) (Sur Sarovar/Keetham Lake) | उत्तर प्रदेश | 2020 |
क्या होता है रामसर स्थल?
रामसर स्थल उन आर्द्रभूमियों को कहा जाता है जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारिस्थितिक महत्व के लिए मान्यता प्राप्त होती है। इन क्षेत्रों का संरक्षण रामसर कन्वेंशन के तहत किया जाता है।
कैसे शुरू हुआ रामसर कन्वेंशन?
रामसर कन्वेंशन को वर्ष 1971 में ईरान के रामसर में अपनाया गया था और यह 1975 में लागू हुआ। यह दुनिया का पहला अंतर-सरकारी समझौता था जो किसी एक विशेष पारिस्थितिकी तंत्र, आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए आयोजित किया गया था।
आर्द्रभूमि (Wetland) क्या होती है?
रामसर कन्वेंशन के अनुसार, आर्द्रभूमि ऐसे क्षेत्र होते हैं जहां पानी स्थायी या अस्थायी रूप से मौजूद रहता है। इनमें दलदली क्षेत्र, झीलें, तालाब, पीटलैंड, खारे या मीठे पानी वाले क्षेत्र और उथले समुद्री तटीय इलाके भी शामिल हो सकते हैं।
विश्व आर्द्रभूमि दिवस कब मनाया जाता है?
हर साल 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को आर्द्रभूमियों के महत्व और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष का थीम "Wetlands and Traditional Knowledge: Celebrating Cultural Heritage" है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?
सुरहा ताल का 100वें रामसर स्थल के रूप में चयन केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि भारत पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। इससे न केवल जैव विविधता को संरक्षण मिलेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका, जल सुरक्षा और जलवायु अनुकूलन क्षमता भी मजबूत होगी।
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