DRDO ने बैक-टू-बैक 3 मिसाइलों का किया सफल टेस्ट, एलीट देशों में भारत की एंट्री, देखें फीचर
DRDO Missile Test: DRDO ने लगातार तीन सफल मिसाइल टेस्ट कर भारत की रक्षा क्षमता को नई मजबूती दी है। इस मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम में इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों को रोकने की क्षमता है। चलिए जानते है इसके फीचर के बारें में..
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के सफल प्रयास में भारत को रक्षा क्षेत्र में एक नई ऊंचाई पर ला खड़ा किया है. DRDO ने 10 और 11 जून 2026 को मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम और एक नई एंटी-शिप मिसाइल (Anti-Ship Missile-Medium Range) का सफल परीक्षण कर देश की सुरक्षा क्षमता को नई मजबूती प्रदान की है, साथ ही DRDO ने भी अपनी क्षमता का परिचय दिया है।
मिसाइल टेस्ट में क्या रहा खास
इन परीक्षणों की सबसे बड़ी खास बात यह रही कि भारत ने ऐसी तकनीक का प्रदर्शन किया, जो दुश्मन की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ध्वस्त कर सकती है. साथ ही यह इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) जैसे बड़े खतरों को भी लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही भेदने में सक्षम है. इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास एडवांस बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम मौजूद है।
दो दिन में तीन सफल टेस्ट लांच
बता दें कि DRDO ने 10 और 11 जून को लगातार तीन फ्लाइट टेस्ट किए। इनमें मल्टी-लेयर्ड BMD सिस्टम के इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने टारगेटों को सफलतापूर्वक ट्रैक कर सटीकता के साथ नष्ट किया।
यह सिस्टम कई लेवल पर काम करता है। इसमें, दुश्मन की मिसाइल लॉन्च होते ही एडवांस रडार और सेंसर की मदद से इंटरसेप्ट करने की क्षमता है. आसान शब्दों में कहें तो यह भारत के लिए एक मजबूत "रक्षा कवच" का काम करेगा.
पहली बार हुआ नई नेवल मिसाइल का परीक्षण
बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के अलावा DRDO ने पहली बार नेवल एंटी-शिप मिसाइल–मीडियम रेंज (NASM-MR) का भी सफल फ्लाइट टेस्ट किया। यह मिसाइल भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।
क्यों है यह उपलब्धि खास?
आज के दौर में मिसाइल हमले किसी भी देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हैं। ऐसे में सिर्फ मिसाइल बनाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि दुश्मन की मिसाइलों को रोकने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
भारत के नए BMD सिस्टम ने दिखाया है कि वह अब सिर्फ हमला करने की क्षमता ही नहीं, बल्कि अपनी रक्षा करने की तकनीक में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। यही कारण है कि इन सफल परीक्षणों के बाद भारत को मिसाइल रक्षा क्षमता रखने वाले दुनिया के चुनिंदा देशों में गिना जा रहा है।
रक्षा मंत्री ने दी बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन सफल परीक्षणों पर DRDO और वैज्ञानिकों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी नई दिशा देगी।
भारत की बढ़ती रक्षा ताकत का संकेत
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने मिसाइल टेक्नोलॉजी, एयर डिफेंस सिस्टम, रडार और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के विकास में खासी प्रगति की है। ऐसे में कह सकते है कि दुश्मन लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए खतरा पैदा करने की कोशिश करता है, तो भारत के पास उन्हें हवा में ही रोकने और नष्ट करने की क्षमता मौजूद है।
The @DRDO_India has successfully demonstrated multiple crucial technologies bolstering nations defence capabilities against different types of enemy threats.
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) June 13, 2026
Three consecutive flight-tests were successfully conducted to demonstrate multi-layered defence against long range… pic.twitter.com/0DKQF0LB30
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