भारत के इतिहास में क्या था Pitt’s India Act, जानें यहां

Last Updated: Jun 24, 2026, 18:48 IST

भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें राजव्यवस्था में पिट्स इंडिया एक्ट के बारे में पढ़ने को मिलता है। क्या आप इस एक्ट के बारे में जानते हैं, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।

पिट्स इंडिया एक्ट
पिट्स इंडिया एक्ट

भारत में 200 सालों तक ब्रिटिश शासन रहा था। इस दौरान अंग्रेजों ने भारत में विभिन्न कानून बनाए, जिनमें से एक पिट्स इंडिया एक्ट,1784 है। इसे 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट की कमियों को पूरा करने के लिए लागू किया गया था, जिसका नाम तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री विलियम पिट के नाम पर रखा गया था। क्या था पिट्स इंडिया एक्ट, इस बारे में हम विस्तार से जानेंगे। 

भारत में हुई Dual Government की शुरुआत

पिट्स इंडिया एक्ट ने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक और राजनीतिक काम को एक-दूसरे से अलग कर दिया था। 

कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स

यह कंपनी की पुरानी संस्था थी, जिसे भारत में कंपनी के व्यापारिक मामलों को संभालने की जिम्मेदारी दी गई थी।

बोर्ड ऑफ कंट्रोल

ब्रिटिश सरकार ने 6 सदस्यों वाले एक नियंत्रण बोर्ड का गठन किया था। इसका काम भारत में कंपनी के सभी नागरिक, सैन्य और रेवेन्यू से जुड़े मामलों पर नियंत्रण करना था। इस बोर्ड के अध्यक्ष ब्रिटिश कैबिनेट के मंत्री होते थे। आपको बता दें कि भारत में ड्यूल सरकार का सिस्टम 1858 तक चलता रहा था।

ब्रिटिश अधिकार क्षेत्र का भारत 

इस अधिनियम के तहत पहली बार कंपनी के अधीन आने वाले भारतीय क्षेत्रों को आधिकारिक तौर पर ‘भारत में ब्रिटिश अधिकार अधीन क्षेत्र’ कहा गया था। इसका मतलब यह था कि ब्रिटिश संसद ने यह साफ कर दिया था कि भारत पर असली मालिकाना हक अब ब्रिटिश क्राउन का है, कंपनी तो बस एक जरिया के रूप में यहां मौजूद है।

गवर्नर-जनरल की शक्तियों में हुआ बदलाव

रेगुलेटिंग एक्ट लागू होने के बाद गवर्नर-जनरल को फैसले लेने में दिक्कतें आती थीं। क्योंकि उसकी काउंसिल के सदस्य उसका विरोध कर देते थे। ऐसे में पिट्स इंडिया एक्ट ने इस समस्या का समाधान निकाला।

इस एक्ट के माध्यम से गवर्नर-जनरल की काउंसिल के सदस्यों की संख्या 4 से घटाकर 3 कर दी गई थी, जिससे गवर्नर-जनरल के लिए अपनी काउंसिल में बहुमत साबित करना और फैसलों को लागू करना बहुत आसान हो गया था। इसके अतिरिक्त, बंबई और मद्रास प्रेसीडेंसियों को पूरी तरह से बंगाल के अधीन कर दिया गया था। 

युद्ध और संधि करने पर लग गई थी रोक

पिट्स इंडिया एक्ट के माध्यम से ब्रिटिश सरकार ने कंपनी को किसी भी राजा से युद्ध करने या फिर संधि करने पर रोक लगा दी थी। इस एक्ट ने यह स्पष्ट किया था कि गवर्नर-जनरल को भारत में किसी भी राजा के खिलाफ युद्ध शुरू करने या संधि करने से पहले अब लंदन में बैठे अधिकारियों की लिखित अनुमति लेनी होगी, जिसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jun 24, 2026, 18:48 IST

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