लोहागढ़ किला, जहां रखा जाता था छत्रपति शिवाजी महाराज का खजाना
आपने राजस्थान के लोहागढ़ किले के बारे में पढ़ा या सुना होगा। हालांकि, इसके अलावा महाराष्ट्र में भी लोहागढ़ किला है। यह किला अपनी ऊंचाई और वास्तुकला के लिए जाना जाता है। इसके साथ ही, यह वह जगह है, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज का छिपा खजाना रखा जाता था।
लोहागढ़ का एक किला राजस्थान में स्थित है, जिसे अजयगढ़ के नाम से भी जाना जाता है। वहीं, एक लोहागढ़ का किला महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित है। यह सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला की पहाड़ियों पर बना हुआ है। इस किले को अपने समय का अभेद्य और बहुत सुरक्षित किला माना जाता था। दुश्मनों द्वारा इस किले को जीतना बहुत मुश्किल था।
यही वजह है कि छत्रपति शिवाजी महाराज का छिपा खजाना यहां रखा जाता था। वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा इसे राष्ट्रीय महत्त्व का किला घोषित किया गया है और आज इस किले में लोग घूमने के लिए पहुंचते हैं।
कहां और कैसे बना है किला
लोहागढ़ किला लोनावला हिल स्टेशन से करीब 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। किले के पास भारत की प्रसिद्ध भाजा गुफाएं भी हैं। किले का निर्माण समुद्र तल से करीब 1033 मीटर की ऊंचाई पर किया गया है। वहीं, इस किले के सामने विसापुर किला भी मौजूद है, जो कि इससे एक छोटी पहाड़ी के जरिये जुड़ा हुआ है। इन दोनों किलों के बीच आने-जाने का रास्ता भी बना हुआ है।
क्या है लोहागढ़ किले का इतिहास
अब हम लोहागढ़ किले का इतिहास जान लेते हैं। इस किले पर अलग-अलग राजवंशों ने राज किया है। किले का निर्माण सातवाहन राजवंश के समय में हुआ था, जिसके बाद यहां चालुक्य, राष्ट्रकूट और बहमनी सुल्तानों का शासन रहा।
छत्रपति शिवाजी ने कब जीता था लोहागढ़
छत्रपति शिवाजी ने 1648 में इस किले को जीत लिया था। उस समय यह किला सूरत से लूटे गए शाही खजाने को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि, 1665 में पुरंदर की संधि के तहत शिवाजी महाराज को यह किला मुगलों को सौंपने पड़ा था। लेकिन, अगले 5 वर्ष बाद उन्होंने 1670 में इस किले पर फिर से अपना नियंत्रण कर लिया था।
नाना फड़नवीस ने बनाया निवास स्थान
बाद में यहां पेशवाओं ने भी राज किया। इस कड़ी में मराठा साम्राज्य के नाना फड़नवीस ने इसे अपना निवास स्थान बनाया। उन्होंने यहां कई संरचनाओं का निर्माण करवाया।
किले की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
लोहागढ़ का किला अपनी वास्तुकला और संरचना के लिए जाना जाता है। यहां चार बड़े और मजबूत दरवाजे बने हुए हैं, जिसमें गणेश दरवाजा, नारायण दरवाजा, हनुमान दरवाजा और महादरवाजा शामिल है। किले के आखिर में जाकर एक लंबी और पतली पहाड़ी देखने को मिलती है, जो कि बिच्छू के डंक के आकार की तरह लगती है। इसे 'विंचू काटा' भी कहा जाता है। युद्ध के दौरान यहां से दुश्मन की सेना पर नजर रखी जाती थी।
किले के ऊपर बने हैं टैंक
इस किले में ऊपर की तरफ पहाड़ी को काटकर कई टैंक बनाए गए हैं, जिनमें वर्षा का पानी इकट्ठा होता है। इन टैंकों का निर्माण युद्ध के समय पानी की कमी से बचने के लिए किया गया था। आज यह किला ट्रैकर्स के लिए पसंदीदा जगह है। क्योंकि, मानसून के दौरान यहां नजारा और भी खूबसूरत हो जाता है।
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