पूर्वांचल का सबसे छोटा जिला, जिनमें आती हैं सिर्फ 3 तहसील
पूर्वांचल भारत की संस्कृति में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां की परंपराएं और समृद्ध विरासत इसे देश के अन्य हिस्सों से अलग बनाती हैं। इस लेख में हम पूर्वांचल के सबसे छोटे जिले के बारे में जानेंगे।
पूर्वांचल देश का वह अहम हिस्सा है, जिसका जुड़ाव भारत की सांस्कृतिक विरासत और समृद्ध इतिहास में प्रमुखता से देखने को मिलता है। यहां की भाषा, पहनावा, खान-पान और लोगों का मिलनसार व्यवहार इसकी विशेषता को बढ़ाने में मदद करता है। इस कड़ी में यहां कई जिले मौजूद हैं। हालांकि, इनमें सबसे छोटे जिले की बात करें, तो यह पूर्वी उत्तर प्रदेश में आता है और यह जिला भदोही है। आधिकारिक तौर पर इस जिले को संत रविदास नगर नाम से भी जाना जाता है।
कितना बड़ा है भदोही
भदोही के कुल एरिया की बात करें, तो यह 1,015 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। जिले का इतिहास देखें, तो पहले यह वाराणसी प्रमंडल का हिस्सा हुआ करता था, जिसे 30 जून 1994 को वाराणसी से अलग कर उत्तर प्रदेश के 65वें जिले के रूप में गठित किया गया। भदोही में सिर्फ 3 तहसील आती हैं, जो कि भदोही, ज्ञानपुर और औराई हैं।
पूर्वांचल के प्रमुख जिलों से घिरा है भदोही
यूपी का भदोही जिला चारों ओर से पूर्वांचल के प्रमुख जिलों से घिरा हुआ है, जो कि इस प्रकार हैः
उत्तर: जौनपुर जिला
पूर्व: वाराणसी जिला
दक्षिण: मिर्जापुर जिला
पश्चिम: प्रयागराज जिला
भदोही का प्रशासनिक मुख्यालय
भदोही जिले का प्रशासनिक मुख्यालय ज्ञानपुर में है। यह जिला बेशक आकार में छोटा है, हालांकि इसका मुख्यालय गंगा, वरुणा और मोरवा नदियों के उपजाऊ मैदानी भाग में बना हुआ है।
कारपेट सिटी के तौर पर होती है पहचान
भदोही जिले की पहचान वैश्विक स्तर पर कारपेट सिटी के तौर पर होती है। यहां की कालीन विश्व प्रसिद्ध है। यही वजह है कि इसे भारत का कालीन नगरी भी कहा जाता है। यहां बनने वाली कालीन को हाथ से बुना जाता है, जिसकी मांग अमेरिका और यूरोप समेत अन्य देशों में रहती है। आपको बता दें कि यहां के कालीन उद्योग को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication - GI) टैग मिला हुआ है।
भदोही का समाहित स्थल
भदोही में सीतामढ़ी का प्रसिद्ध मंदिर है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि का आश्रम यहीं था, जहां लव-कुश का जन्म हुआ और देवी सीता पृथ्वी में समाहित हुई थीं। इस वजह से इस जगह को लेकर लोगों में अधिक आस्था देखने को मिलती है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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