भारत का यह राज्य बना सबसे बड़ा ऊन उत्पादक, जानें जवाब

Last Updated: Feb 12, 2026, 14:05 IST

भारत में कुल 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। इन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की अपनी विशेषता है। हाल ही में एक राज्य देश का सबसे बड़ा ऊन उत्पादक राज्य बना है। कौन-सा है यह राज्य, जानने के लिए यह लेख पढ़ें। 

सबसे बड़ा ऊन उत्पादक राज्य
सबसे बड़ा ऊन उत्पादक राज्य

भारत को विविधताओं का देश कहा जाता जाता है। यहां कुल 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। इन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की अपनी विशेषता है। ऊन उत्पादन के मामले में भारत नौवें  स्थान पर आता है। हालांकि, भेड़ों के मामले में यह दूसरे स्थान पर है। यहां 77.4 मिलिनय भेड़े हैं।

इन भेड़ों से ऊन निकालकर सर्दी के कपड़े, कालीन और अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं। भारत के अलग-अलग राज्यों में ऊन का उत्पादन होता है। इनमें से एक राज्य ने हाल ही में सबसे बड़ा ऊन उत्पादक राज्य बनने की उपलब्धि हासिल की है। कौन-सा है यह राज्य, जानने के लिए यह लेख पढ़ें। 

सबसे बड़ा ऊन उत्पादक राज्य 

भारत के सबसे बड़े ऊन उत्पादक राज्य की बात करें, तो यह राजस्थान है। यह राज्य बीते वर्षों से टॉप पर रहा है। राजस्थान ने एक वर्ष में 16013.5 हजार किलोग्राम ऊन का उत्पादन किया है, जो कि पूरे देश का 47.53 फीसदी है।

राजस्थान में सबसे अधिक ऊन क्यों है

राजस्थान की शुष्क जलवायु और बड़े घास के मैदान यहां भेड़ पालन के लिए इस स्थान को सबसे उपयुक्त बनाते हैं। राजस्थान में हमें भेड़ों की कई देशी नस्लें देखने को मिलती हैं, जिनमें चोकला और मारवाड़ी प्रमुख है। इन नस्लों से मोटा ऊन निकलता है, जिसका उपयोग कालीन और कंबल बनाने के लिए होता है।

दूसरे नंबर पर आता है यह राज्य 

ऊन उत्पादन के मामले में दूसरे नंबर पर जम्मू और कश्मीर आता है। यह अच्छी क्वालिटी वाली ऊन के लिए जाना जाता है। क्योंकि, यहां की जलवायु ठंडी है, ऐसे में यहां चांगथांगी और मेरिनो भेड़ों को पाला जाता है। इन भेड़ों से प्राप्त होने वाली ऊन को कपड़े, शॉल और हस्तशिल्प उत्पादों में इस्तेमाल किया जाता है। 

भारत में कितने प्रकार के ऊन उत्पादित होते हैं

भारतीय वस्त्र मंत्रालय के मुताबिक, भारत में कुल तीन प्रकार के ऊन उत्पादित होते हैं, जिनमें कारपेट ग्रेड का उत्पादन 85 फीसदी, अपैरल ग्रेड का 5 फीसदी और कोर्सर ग्रेड का उत्पादन 10 फीसदी होता है।

कारपेट ग्रेड

यह ऊन मध्यम खुरदरी और अधिक लचीली होती है। इस ऊन का उपयोग हाथ से बने कालीनों और दरियों में किया जाता है। इनकी विदेशों में भी मांग रहती है। 

अपैरल ऊन

अपैरल ऊन का उत्पादन सिर्फ 5 फीसदी ही है। क्योंकि, यह मैरिन नस्ल की ऊन है, जो कि बहुत ही कम होती है। यह नरम ऊन होती है, जिसका उपयोग पहनने योग्य कपड़े बनाने के लिए होता है। इस वजह से भारत ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से इस ऊन को आयात करता है। 

कोर्सर ग्रेड

कोर्सर ग्रेड एक निम्न गुणवत्ता वाली ऊन होती है, जिसका उपयोग सस्ते कंबल और दरी बनाने के लिए किया जाता है। इसे दक्षिण भारत की डेक्कनी भेड़ों से प्राप्त किया जाता है। 

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Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior content writer

A seasoned journalist with over 7 years of extensive experience across both print and digital media, skilled in crafting engaging and informative multimedia content for diverse audiences. His expertise lies in transforming complex ideas into clear, compelling narratives that resonate with readers across various platforms. At Jagran Josh, Kishan works as a Senior Content Writer (Multimedia Producer) in the GK section. He writes on national and international topics from a GK perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com

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