छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन की महत्त्वपूर्ण संधियां कौन-सी हैं, यहां देखें लिस्ट

Last Updated: Feb 19, 2026, 17:37 IST

छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य के नींव रखने वाले योद्धा थे। उन्होंने अपने जीवन में कई महत्त्वपूर्ण संधियां की थीं, जिनमें पुरंदर से लेकर अन्य शामिल हैं। इस लेख में हम उन सभी संधियों के बारे में विस्तार से जानेंगे। 

छत्रपति शिवाजी महाराज
छत्रपति शिवाजी महाराज

छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे। उन्हें एक महान योद्धा के साथ-साथ चतुर कूटनीतिज्ञ के तौर पर भी जाना जाता था। उन्होंने अपनी कुशल रणनीति से अपने साम्राज्य का विस्तार किया और मराठाओं के मजबूत भविष्य की नींव रखी। अपने शासनकाल में स्वराज और रक्षा के लिए उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण संधियां की। इसमें पुरंदर से लेकर कुतुबशाही संधि तक शामिल है। हालांकि, इन्हें अलग-अलग समय पर जरूरत के हिसाब से किया गया था। इस लेख में हम इन संधियों के बारे में विस्तार से जानेंगे। 

क्यों और कब हुई पुरंदर की संधि(Treaty of Purandar)

पुरंदर की संधि साल 1665 में की गई थी। यह छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन की सबसे बड़ी और कठिन संधियों में से एक है। संधि मुख्य रूप से शिवाजी और मुगल सेनापति मिर्जा राजा जयसिंह के बीच हुई थी। 

क्यों हुई थी संधि

राजा जयसिंह ने पुरंदर के किले को हर तरफ से घेर लिया था। इसके बाद शिवाजी महाराज के पास रणनीति रूप से पीछे हटना ही उचित था। ऐसे में उन्होंने अपने 35 में से 23 किलों को मुगलों को दे दिए थे। साथ ही, अपने पुत्र संभाजी महाराज के साथ आगरा में औरंगजेब से मिलना भी स्वीकार करने के साथ बीजापुर के सुल्तान के खिलाफ मुगलों का साथ देने का वादा भी किया था।

मुगलों के साथ दूसरी संधि

शिवाजी महाराज की मुगलों के साथ दूसरी संधि 1668 में हुई थी। आगरा की कैद से निकलने के बाद शिवाजी महाराज कुछ समय के लिए शांत रहे थे और इस दौरान अपने किलों को वापस पाने और शक्ति को संगठित करने के लिए उन्होंने समय का उपयोग किया। बाद में औरंगजेब ने शिवाजी महाराज को राजा की उपाधि दी और बरार की जागीर भी प्रदान कर दी थी। हालांकि, यह एक अस्थायी समझौता था।

क्यों और कब हुई कुतुबशाही संधि

शिवाजी महाराज ने अपने अंतिम वर्षों में 1677 में कर्नाटक अभियान के दौरान कुतुबशाही संधि की थी। यह संधि शिवाजी महाराज और गोलकुंडा के सुल्तान अबुल हसन कुतुब शाह के बीच हुई थी।

क्या थे संधि के परिणाम

संधि के तहत कुतुब शाह ने शिवाजी महाराज को प्रति वर्ष धनराशि देने और अभियान में सहायता करने का वादा किया। इसके बदले में जीते गए क्षेत्र का कुछ हिस्सा सुल्तान को देना तय हुआ। यही वह संधि थी, जिसके तहत शिवाजी महाराज ने जिंजी और वेल्लोर जैसे किलों को जीत लिया था।

संधियों के पीछे का क्या था महत्त्व

  • संधियों के माध्यम से शिवाजी महाराज को अपनी सेना के लिए समय मिल जाता था।
  • पुरंदर की संधि में खोए हुए अपने किलों को शिवाजी महाराज ने अगले कुछ वर्षों में अपनी बुद्धिमता और पराक्रम से जीत लिया था।
  • शिवाजी महाराज ने संधियों के माध्यम से यह साबित किया था कि ये उनकी हार नहीं है, बल्कि यह उन्हें और मजबूत बनने के लिए मिलने वाला समय है।

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Kishan Kumar
Kishan Kumar

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