एक रेलवे लोको पायलट का पूरा दिन कैसा बीतता है? जानिए आसान भाषा में यहां जानें
भारतीय रेलवे के बारे में कौन नहीं जानता। इसे जीवन की रेखा भी कहा जाता है क्योंकि यह देश के एक कोने से दूसरे कोने में जाती है। भारतीय ट्रेन को चला रहे कर्मचारियों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। जिसकी वजह साफ है। इसमें गरीब से गरीब और अमीर से अमीर यात्री सफर करता है। भारतीय रेल को चलाने वालों पर भी काफी जिम्मेदारी होती है। इसमें जरा सी भी चूक भारी पड़ सकती है। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर एक रेलवे लोको का क्या काम होता है और उसका पूरा दिन कैसे बीतता है। आसाना भाषा में यहां जानें।
‘भारतीय रेल’—इसके बारे में कौन नहीं जानता, जिससे हजारों लोग रोजाना सफर करते हैं। इसमें गरीब से गरीब और अमीर से अमीर यात्री सफर करता है। भारतीय रेल को देश की जीवन रेखा भी कहा जाता है। इसे चलाने वालों पर भी कम जिम्मेदारी नहीं होती। इसमें जरा सी भी लापरवाही से किसी की जान तक जा सकती है। इसके लिए अलग-अलग पदों पर नियुक्ति की जाती है। इनमें अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, महाप्रबंधक, मंडल रेल प्रबंधक, स्टेशन मास्टर, लोको पायलट, टिकट परीक्षक और ट्रैकमैन आदि पद शामिल हैं। हम आपको नीचे लेख में बताएंगे कि आखिर एक लोको पायलट का क्या काम होता है और उसका पूरा दिन कैसे बीतता है।
लोको पायलट कौन होता है?
एक लोको पायलट पूरे दिन क्या काम करता है? इस सवाल के जवाब से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर एक लोको पायलट कौन होता है? भारतीय रेलवे में ट्रेन को चलाने वाले मुख्य चालक को कहा जाता है। इन्हें आम भाषा में ट्रेन का ड्राइवर भी कहा जाता है। लोको पायलट ट्रेन संचालन, सिग्नल का पालन, इंजन की निगरानी और सहायक लोको पायलट की मदद करता है।
लोको पायलट कैसे बनते हैं?
लोको पायलट बनने के लिए उम्मीदवार के पास 10वीं पास की मार्कशीट के साथ आईटीआई या किसी मान्यता प्राप्त ट्रेड में डिप्लोमा/इंजीनियरिंग होना आवश्यक है। लोको पायलट के लिए हर साल रेलवे भर्ती बोर्ड कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT), साइकोमेट्रिक टेस्ट और मेडिकल परीक्षा का आयोजन करता है। लोको पायलट बनने के बाद शुरुआती इन-हैंड सैलरी लगभग 25,000 से 35,000 रुपये प्रति माह मिलतीहै। सरकारी सुविधाएं भी मिलती है।
लोको पायलट हर दिन क्या काम करता है?
सबसे पहले लोको पायलट लॉबी में पहुंचता है, जहां उन्हें अपना अल्कोहल टेस्ट कराना होता है। इसके बाद वे ट्रेन के संचालन से जुड़े निर्देश पत्र को ध्यान से पढ़ते हैं। निर्देश पत्र को ध्यान से पढ़ने के बाद लोको पायलट असिस्टेंट लोको पायलट के साथ इंजन कैब में पहुंचते हैं और ब्रेक सिस्टम, हेडलाइट और हॉर्न सहित अन्य उपकरणों को अच्छे से चेक करते हैं, ताकि रास्ते में किसी तरह की कोई दिक्कत न हो।अब जब ट्रेन अपने स्टेशन से चलना शुरू करती है, तो उस दौरान लोको पायलट पटरियों के किनारे लगे सिग्नल पर नजर और ट्रेन की गति को कंट्रोल करने का काम करते हैं।
इंजन में एक विजिलेंट कंट्रोल डिवाइस बटन भी होता है, जिसे हर 60 सेकंड में लोको पायलट को बजाना है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि लोको पायलट पूरी तरह होश में है। अपने ट्रेन के सफर के दौरान लोको पायलट लगातार स्टेशन मास्टर और कंट्रोल रूम के संपर्क में रहते हैं।
जब लोको पायलट अपनी यात्रा पूरी कर लेते हैं, तो वे गंतव्य स्टेशन पर पहुंचने के बाद ट्रेन को दूसरे क्रू को सौंपते हैं। इसके बाद वे 'साइन-ऑफ' करते हैं।
Farhan Khan is an education journalist with over 3 years of experience specializing in the public sector recruitment space. From UPSC and SSC to Banking and Defense, he provides end-to-end coverage on exam notifications, admit cards, and Sarkari results. Farhan holds a Master’s degree in Mass Communication from Guru Jambheshwar University and blends research-driven journalism with creative storytelling to guide aspirants through their exam preparation journeys.