हरियाणा के ये 5 जिले NCR से हो सकते हैं बाहर! इस तारीख को अहम बैठक, पढ़ें पूरी डिटेल्स

Last Updated: Jun 11, 2026, 16:13 IST

हरियाणा के करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी जिलों को NCR से बाहर करने के प्रस्ताव पर 16 जून को NCR प्लानिंग बोर्ड की बैठक में चर्चा होगी। राज्य सरकार का कहना है कि NCR के कड़े नियम इन जिलों के विकास और उद्योगों पर असर डाल रहे हैं। 

नया फॉर्मूला लागू हुआ तो क्या बदलेगा?
नया फॉर्मूला लागू हुआ तो क्या बदलेगा?

दिल्ली से सटे हरियाणा के कुछ जिलों को लेकर एक अहम खबर सामने आई है, इन जिलों के लाखों लोगों के लिए 16 जून अहम दिन साबित हो सकता है। NCR (नेशनल कैपिटल रीजन) की सीमा में बड़ा बदलाव करने की तैयारी चल रही है और इसके तहत हरियाणा के पांच जिलों को NCR से बाहर किया जा सकता है। इस प्रस्ताव पर NCR प्लानिंग बोर्ड की बैठक में चर्चा होगी। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो राज्य के NCR क्षेत्र का नक्शा काफी बदल जाएगा। चलिए इसके बारें में विस्तार से जानते है। 

कौन-से जिले NCR से हो सकते हैं बाहर?

जिन जिलों को NCR से बाहर करने का प्रस्ताव रखा गया है, उनमें करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी शामिल हैं। फिलहाल हरियाणा के 22 में से 14 जिले NCR का हिस्सा हैं, यानी आधे से अधिक राज्य एनसीआर रीजन में आता है, लेकिन नए प्रस्ताव के बाद यह संख्या कम हो सकती है। 

करनाल

जींद

महेंद्रगढ़ 

भिवानी

चरखी दादरी 

आखिर NCR होता क्या है?

दिल्ली में बढ़ती आबादी, ट्रैफिक और संसाधनों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए NCR की अवधारणा बनाई गई थी। इसका मुख्य एजेंडा दिल्ली के आसपास के शहरों और जिलों में भी विकास, रोजगार और बेहतर सुविधाएं पहुंचाना था ताकि लोगों को हर जरूरत के लिए राजधानी का रुख न करना पड़े। इसी पहल के साथ 1985 में NCR प्लानिंग बोर्ड का गठन किया गया था। आज NCR में दिल्ली के अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई जिले शामिल हैं। 

राज्य सरकार क्यों चाहती है कि ये जिले बाहर हों?

हरियाणा सरकार का मानना है कि दिल्ली से काफी दूर स्थित कुछ जिलों को NCR में रखने का अपेक्षित फायदा नहीं मिल रहा। उल्टा उन्हें NCR के कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है।

वहीं सरकार का तर्क है कि जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी जैसे जिलों में उद्योग लगाने और कारोबार बढ़ाने में कई तरह की दिक्कतें आती हैं। पर्यावरण संबंधी नियमों और पाबंदियों का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।

व्यापारियों और किसानों को क्या परेशानी?

NCR में शामिल होने के कारण इन जिलों में NGT और GRAP जैसे सख्त पर्यावरणीय नियमों का पालन करना होता है। इसके अलावा 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध का असर भी स्थानीय लोगों पर पड़ता है।

कई व्यापारी और किसान मानते हैं कि दिल्ली से काफी दूर होने के बावजूद उन्हें उन्हीं नियमों का सामना करना पड़ता है जो राजधानी के आसपास के क्षेत्रों पर लागू होते हैं। इससे परिवहन लागत बढ़ती है और कारोबार प्रभावित होता है।

नया फॉर्मूला लागू हुआ तो क्या बदलेगा?

रीजनल प्लान-2041 के तहत प्रस्ताव है कि NCR की सीमा दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर के दायरे तक सीमित की जाए। यदि ऐसा होता है तो हरियाणा का NCR क्षेत्र काफी छोटा हो जाएगा। मौजूदा समय में राज्य का NCR क्षेत्र 25 हजार वर्ग किलोमीटर से ज्यादा है। नए फॉर्मूले के लागू होने पर यह घटकर करीब 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर रह सकता है।

16 जून की बैठक पर टिकी हैं निगाहें

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब सबकी नजर 16 जून को होने वाली NCR प्लानिंग बोर्ड की बैठक पर है। इसी बैठक में तय होगा कि हरियाणा का प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है या नहीं।

यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी जैसे जिले NCR से बाहर हो सकते हैं। इसका असर भविष्य की विकास योजनाओं, उद्योगों, निवेश और स्थानीय नियमों पर भी देखने को मिल सकता है।

Bagesh Yadav
Bagesh Yadav

Senior Executive - Editorial

Bagesh Yadav is a journalist and current affairs analyst with over six years of experience in education journalism, national and international affairs, and digital media. He has contributed to India’s leading knowledge platforms, including Vision IAS and Only IAS, and currently serves in a senior editorial role at Jagranjosh.com, where he leads coverage across the Current Affairs and General Knowledge sections. His expertise spans breaking news, government policy analysis, world affairs, sports updates, science and technology, and visually engaging infographics. Known for his commitment to factual accuracy, editorial integrity, and audience-first storytelling, Bagesh delivers well-researched, accessible, and impactful journalism that serves millions of students, competitive exam aspirants, and informed readers across India.

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First Published: Jun 11, 2026, 16:13 IST

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