भारत में मुगलों का शासन 1526 में शुरू हुआ और यह 1857 में जाकर खत्म हुआ। हालांकि, बक्सर के युद्ध के बाद मुगल सिर्फ नाम के शासक रह गए थे, क्योंकि इसके बाद सत्ता का अधिकांश हिस्सा बिटिश के हाथों में चला गया था। ऐसे में मुगलों को सिर्फ कठपुतली की तरह इस्तेमाल किया जाता था। मुगलों का कुल शासनकाल देखें, तो यह करीब 331 सालों तक देखने को मिलता है।
ऐसे में इस दौरान भारत में 20 मुगल शासकों ने शासन किया और प्रत्येक मुगल सम्राट अपनी अलग-अलग विशेषताओं की वजह से जाना गया। इन मुगल शासकों में एक मुगल शासक ऐसे भी हैं, जिन्हें ‘शाहे-बेखबर’ भी कहा जाता था। कौन थे यह मुगल शासक और क्या थी शाहे-बेखबर कहने की वजह, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
किस मुगल सम्राट को कहा जाता था ‘शाहे-बेखबर’
आपको बता दें कि भारत में 1707 से 1712 तक शासन करने वाले बहादुर शाह प्रथम को ‘शाहे-बेखबर’ कहा जाता था। उन्हें यह उपाधि इतिहासकार खाफी खान द्वारा दी गई थी।
क्यों कहा जाता था ‘शाहे-बेखबर’
मुगल बादशाह बहादुर शाह प्रथम को ‘शाहे-बेखबर’ कहने के पीछे कई प्रमुख कारण थे, जो कि इस प्रकार हैंः
लापरवाही बनी कारण
बहादुर शाह प्रथम ने सत्ता की गद्दी संभाली, तो वह 63 वर्ष के थे। ऐसे में उस समय वह निर्णय लेने में अपने पूर्वजों की तरह उतने सक्षम नहीं थे। वह प्रशासन पर ध्यान देने के बजाय लापरवाह रहते थे।
लोगों के बीच बांटी जागीरें और पद
बहादुर शाह प्रथम अक्सर अपने समर्थकों को खुश करने के लिए जागीरें और पद बांट दिये करते थे। इससे मुगल खजाने पर बहुत असर पड़ा और उनका प्रशासन कमजोर होने लगा था, जो कि पहले से ही औरंगजेब के दक्कन अभियान के कारण कमजोर हो चुका था।
दरबार की गुटबाजी से रहे अंजान
बहादुर शाह प्रथम के समय उनके दरबार में उनके अधिकारी आपस में ही षड्यंत्र रचने लगे थे। ऐसे में उनके दरबारियों में गुटबाजी होने लगी थी। हालांकि, बहादुर शाह प्रथम इससे अंजान थे, जिससे उनके शासन पर असर पड़ा और वह कमजोर हो गया।
सुलह-ए-कुल के लिए जाने जाते हैं बहादुर शाह प्रथम
बहादुर शाह प्रथम को सुलह-ए-कुल नीति के लिए जाना जाता है। इसके तहत उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह को मनसब प्रदान किया था। साथ ही, उन्होंने छत्रपति शिवाजी के वंशज शाहू को कैद से मुक्त किया था। इससे मराठाओं में सत्ता को लेकर आपसी संघर्ष हुआ और मुगलों पर दबाव कम हुआ था। उन्होंने ही मेवाड़ के राजपूतों के साथ संधि कर उनकी रियासतें लौटा दी थीं।
लाहौर में हुई मृत्यु
बहादुर शाह प्रथम की मृत्यु लाहौर में हुई। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी मौत के काफी समय बाद उन्हें दफनाया गया था, क्योंकि उनके बेटे उत्तराधिकार को लेकर आपस में लड़ रहे थे।
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