भारत का वह आंदोलन, जिसमें ईट के रंग से रंग दिये थे कुर्ते

Last Updated: Jul 13, 2026, 19:03 IST

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई बड़े आंदोलन हुए थे, जिनमें से एक लाल कुर्ती आंदोलन था। इस आंदोलन का केंद्र भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में था। इस लेख में हम आंदोलन के बारे में विस्तार से जानेंगे।

लाल कुर्ती आंदोलन
लाल कुर्ती आंदोलन

भारत में आपने अलग-अलग स्वतंत्रता संंग्राम आंदोलनों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप लाल कुर्ती आंदोलन के बारे में जानते हैं, जिसे ‘खुदाई खिदमतगार’ यानि कि ईश्वर के सेवक भी कहा जाता था। यह भारत की आजादी के आंदोलन में सबसे महत्त्वूपूर्ण आंदोलनों में से एक था, जिसका मुख्य केंद्र पाकिस्तान हुआ करता था। इस लेख में हम इस आंदोलन के बारे में विस्तार से जानेंगे। 

क्या था लाल कुर्ती आंदोलन 

लाल कुर्ती आंदोलन भारत की आजादी के संघर्ष के दौरान शुरू हुआ था। यह एक अहिंसक आंदोलन था, जिसने उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत के पश्तून सामाज को राष्ट्रवाद की भावना से जोड़ा था। दरअसल, आंदोलन की शुरुआत 1929 में सामाज सुधार आंदोलन के रूप में हुई थी, लेकिन 1930 में यह महात्मा गांधी के सविनय अवज्ञा आंदोलन से जुड़ गया और एक राजनीतिक आंदोलन बना।

किसने शुरू किया था लाल कुर्ती आंदोलन 

लाल कुर्ती आंदोलन के संस्थापक खान अब्दुल गफ्फार खान थे। उनके द्वारा ही यह आंदोलन शुरू किया गया था। उन्हें ‘बादशाह खान’ और ‘सीमांत गांधी’ नाम से भी जाना जाता था, जिन्होंने पश्तून सामाज के बीच अहिंसा के विचारों को फैलाया था। 

क्या था आंदोलन का मुख्य उद्देश्य 

आंदोलन में अलग-अलग उद्देश्यों पर आधारित था, जो कि इस प्रकार हैंः

-आंदोलन का मुख्य उद्देश्य अंग्रेजों की नीतियों का विरोध करना और नस्लीय भेदभाव के खिलाफ लड़ना था। 

-इस आंदोलन में बाल विवाह को खत्म करने और महिलाओं को शिक्षित करने पर भी जोर दिया गया था। -इस आंदोलन में सभी हिंदू और सिख के धर्म के लोगों का भी स्वागत किया गया था। 

-खास बात यह है कि पश्तून सामाज पारंपरिक रूप से हिंसक और हथियार उठाने के लिए जाना जाता था, लेकिन इस आंदोलन के प्रभाव से पश्तून सामाज अहिंसक हो गया था।

क्यों पड़ा लाल कुर्ती आंदोलन नाम 

इस आंदोनल के दौरान आंदोलनकारी पहले सफेद कुर्ता पहना करते थे, लेकिन वह गंदा हो जाता था। इस वजह से आंदोलनकारियों ने ईट के रंग से कुर्ते को लाल रंग में रंग दिया, जिसके बाद सभी ने लाल कुर्ता पहना। लाल रंग की वजह से कुर्ता जल्दी गंदा नहीं होता था। ऐसे में अंंग्रेजों ने इसे Red Shirts नाम दिया, जो कि बाद में लाल कुर्ती नाम पड़ गया और इस आंदोलन का नाम भी लाल कुर्ती पड़ गया।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jul 13, 2026, 19:03 IST

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