भारत का वह राज्य, जहां रहते हैं देश के आखिरी ‘हेडहंटर्स’ 

Last Updated: Nov 4, 2026, 12:56 IST

भारत को विविधताओं का देश कहा जाता है। यहां की सांस्कृतिक विरासत और अनूठी विशेषता इसे अन्य देशों से अलग बनाती हैं। क्या आप जानते हैं कि  भारत में एक राज्य ऐसा भी है, जिसे भारत के आखिरी ‘हेडहंटर्स’ कहा जाता है। इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे।

कोन्याक आदिवासी
कोन्याक आदिवासी

भारत के पूर्वोत्तर राज्य अपनी अनूठी संस्कृति, सांस्कृतिक विरासत और समृद्ध इतिहास के लिए जाने जाते हैं। इस कड़ी में यहां एक राज्य ऐसा भी है, जहां भारत के आखिरी ‘हेडहंटर्स’ रहा करते हैं। दरअसल, यहां ‘हेडहंटर्स’ से मतलब उन लोगों से है, जो कि युद्ध के समय दुश्मन के सिर काट दिए करते थे। क्या आप इस राज्य के बारे में जानते हैं, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे। 

किस राज्य में रहते हैं आखिरी ‘हेडहंटर्स’

भारत के पूर्वोत्तर छोर पर म्यांमार की सीमा से सटा नागालैंड एक ऐसा राज्य है, जिसकी सांस्कृतिक गहराई, रहस्य और विविधता पूरी दुनिया को हैरान करती है। ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों, घने जंगलों और आदिवासी परंपराओं से सजा यह राज्य मुख्य रूप से 'हेडहंटर्स की भूमि' (Land of Headhunters) के रूप में जाना जाता है।

16 से अधिक जनजातियों का घर

नागालैंड मुख्य रूप से 16 से अधिक मान्यता प्राप्त जनजातियों का घर है, जिनमें अंगामी, एओ, सेमा, लोथा और कोन्याक सबसे प्रमुख हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि हर जनजाति की अपनी अलग भाषा, विशिष्ट पारंपरिक वेशभूषा, अलग रीति-रिवाज और अलग त्योहार हैं। एक जनजाति की बोली दूसरी जनजाति से इतनी अलग होती है कि वे आपस में बातचीत करने के लिए अक्सर नागा और असमिया भाषा का मिश्रण या अंग्रेजी का इस्तेमाल करते हैं। 

मोरुंग की अनूठी सामाजिक व्यवस्था

नागालैंड के आदिवासी समाज में 'मोरुंग' प्रणाली का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व रहा है। पारंपरिक रूप से मोरुंग गांव के युवाओं का एक साझा छात्रावास और प्रशिक्षण केंद्र हुआ करता था। यहीं पर कबीले के बुजुर्ग युवाओं को युद्ध कौशल, शिकार के तरीके, लोकगीत, लकड़ी की नक्काशी और अपने पूर्वजों की वीर गाथाएं सिखाते थे। गांव की सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था की पूरी कमान इन्हीं मोरुंग्स के माध्यम से संचालित होती थी।

कोन्याक जनजाति और 'हेडहंटिंग' का इतिहास 

नागालैंड के मोन जिले में रहने वाली 'कोन्याक' जनजाति इस राज्य की सबसे रहस्यमयी और प्रसिद्ध जनजाति है। इतिहास में इन्हें भारत के सबसे खूंखार योद्धाओं और 'हेडहंटर्स' यानि दुश्मनों का सिर धड़ से अलग करने वाले के रूप में जाना जाता था। पुरानी मान्यताओं के अनुसार, इन योद्धाओं के बीच दुश्मनों का सिर काटकर लाना बहादुरी, सम्मान और कबीले की रक्षा का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता था।

जो योद्धा जितने ज्यादा सिर काटकर लाता था, उसके चेहरे और छाती पर उतने ही टैटू बनाए जाते थे और उसे जानवरों के सींगों व पीतल की खोपड़ियों से सजे विशेष आभूषण पहनाए जाते थे। 1960 के दशक के बाद ईसाई धर्म के प्रसार और आधुनिक शिक्षा के प्रभाव से यह प्रथा पूरी तरह से समाप्त हो गई। आज बचे हुए टैटू वाले कुछ बुजुर्ग उस अतीत के आखिरी जीवित गवाह हैं।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Nov 4, 2026, 12:56 IST

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