भारत का नया AS-HAPS मिशन: अब 20 किमी की ऊंचाई से होगी दुश्मन की 24x7 निगरानी
भारत सीमा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए Airship-based High Altitude Pseudo Satellite (AS-HAPS) प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। चलिए इसके बारें में विस्तार ने जानने की कोशिश करते है।
AS-HAPS प्रोजेक्ट: भारत अपनी सीमा सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है। रक्षा मंत्रालय ने Airship-based High Altitude Pseudo Satellite (AS-HAPS) प्रोजेक्ट की शुरुआत की है।
इस एडवांस प्रोजेक्ट के तहत ऐसे स्वदेशी स्ट्रैटोस्फेरिक एयरशिप विकसित किए जाएंगे, जो करीब 20 किलोमीटर (66,000 फीट) की ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ान भरते हुए सीमाओं पर लगातार निगरानी रख सकेंगे। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 15,000 करोड़ रुपये है और इसका उद्देश्य खुफिया जानकारी जुटाने, सीमा पर निगरानी बढ़ाने और लंबी दूरी तक संचार व्यवस्था को मजबूत बनाना है।
सीमा पर हर पल नजर रखने की तैयारी
रक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने इस प्रोजेक्ट को फरवरी 2026 में मंजूरी दी थी। विकसित होने के बाद ये एयरशिप दिन-रात बिना रुके सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात रह सकेंगे और दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। खास बात यह है कि जरूरत पड़ने पर इन्हें किसी भी संवेदनशील इलाके के ऊपर या उसके आसपास आसानी से तैनात किया जा सकेगा।
हाईटेक कैमरों और सेंसर से लैस होंगे एयरशिप
AS-HAPS में एडवांस इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सिस्टम, हाई-रिजॉल्यूशन डे कैमरा, नाइट विजन और थर्मल इमेजिंग जैसे एडवांस सिस्टम लगाए जाएंगे। ये सिस्टम दुश्मन के इलाके के भीतर गहराई तक गतिविधियों पर नजर रखने में सक्षम होंगे।
इसके अलावा, ये एयरशिप दूरदराज के इलाकों में संचार नेटवर्क को भी मजबूत बनाएंगे, जिससे सैन्य अभियानों के दौरान बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सकेगा।
HAPS क्या है और यह इतना खास क्यों?
High Altitude Pseudo Satellite (HAPS) ऐसे प्लेटफॉर्म होते हैं जो 20 से 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्ट्रैटोस्फियर में काम करते हैं। ये सामान्य सैटलाइट की तुलना में काफी कम ऊंचाई पर होते हैं, लेकिन हाई-एल्टीट्यूड ड्रोन से कहीं अधिक ऊपर उड़ते हैं।
वहीं इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें लंबे समय तक एक ही क्षेत्र के ऊपर तैनात रखा जा सकता है।
आत्मनिर्भर रक्षा और आधुनिक युद्ध की नई रणनीति
यह प्रोजेक्ट Defence Acquisition Procedure (DAP)-2020 के Make-I मॉडल के तहत विकसित की जाएगी, जिसमें अनुसंधान एवं विकास (R&D) की 70 प्रतिशत लागत सरकार वहन करेगी। भारत की सेना पहले से ड्रोन, एडवांस सेंसर, ISTAR विमान और नई सैन्य सैटलाइट सिस्टम पर तेजी से काम कर रही है।
भारत ने भी भरी नई उड़ान
बता दें कि यूएस, चीन, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस और दक्षिण कोरिया जैसे कई देश पहले से इस टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं और अब भारत भी इस एडवांस डिफेंस सिस्टम की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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