भारत के सिर्फ ये परिवार बनाते हैं जगन्नाथ पुरी के रथ, बिना नक्शे के करते हैं तैयार

Last Updated: Jul 14, 2026, 17:51 IST

हर साल जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा के लिए तीन बड़े-बड़े रथ तैयार किये जाते हैं। इन रथ को तैयार करने का काम पारंपरिक रूप से कुछ परिवारों के पास है। इस लेख में हम इन परिवारों के बारे में जानेंगे।

जगन्नाथ पुरी रथ निर्माण
जगन्नाथ पुरी रथ निर्माण

जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा 16 जुलाई, 2026 से शुरू होने जा रही है और 24 जुलाई, 2026 तक चलेगी। यह ओडिसा में प्रमुख आयोजन है। इसके साथ ही धार्मिक आधार पर यह भारत के प्रमुख पर्वों में गिना जाता है। इस कड़ी में तीन बड़े-बड़े रथों को हर साल तैयार किया जाता है, जिन पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा को विराजमान कर यात्रा निकाली जाती है। इन रथों को बनाने का जिम्मा पारंपरिक रूप से सिर्फ कुछ परिवारों के पास ही है, जिन्हें अलग-अलग काम बांटा गया है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।

विश्वकर्मा समुदाय से जुड़े परिवार करते हैं निर्माण

जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा के लिए विश्वकर्मा सेवक समुदाय से जुड़े परिवार हैं, जो कि रथों का निर्माण करते हैं। इनमें अलग-अलग परिवारों को लकड़ी काटने से लेकर नक्काशी और कपड़े सिलना और सजाना जैसे काम बांटे गए। इन्हें अलग-अलग परिवारों में बांटा गया है।

महाराणा परिवार 

महाराणा परिवार रथों के मुख्य बढ़ई होते हैं, जो कि रथ के पहिये, धुरी और पूरे ढांचे को तैयार करते हैं। यही वह परिवार है, जो कि रथ को उसका मूल रूप देते हैं। यह परिवार बिना किसी नक्शे के रथ को अपने पूर्वजों से मिले ज्ञान के आधार पर तैयार करते हैं।

भोई सेवादार

भोई सेवादारों का नेतृत्व भोई सरदार द्वारा किया जाता है। ये बहुत ही मेहनती होते हैं, जो कि बड़ी-बड़ी लकड़ियों को ढोने, उन्हें सही जगह पर पहुंचाने और रथों के बड़े-बड़े हिस्सों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं।

रूपकार परिवार

इस परिवार के पास रथों को मंदिर का रूप देने की जिम्मेदारी होती है। इस परिवार के सदस्य रथ के चारों ओर लकड़ी के घोड़ें, सारथी, कलश और देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाते हैं।

चित्रकार परिवार

चित्रकार परिवार के पास रथों को रंगीन बनाने की जिम्मेदारी होती है। इनके द्वारा रथों पर ओडिसा के पट्टचित्रों को उकेरा जाता है। साथ ही, प्राकृतिक रंगों की पेंटिंग भी बनाई जाती है।

दर्जी परिवार

रथ बनाने वालों में दर्जी परिवार भी होता है, जो कि रथों के लिए बड़ी-बड़ी छतरियां और ड्रैस तैयार करते हैं। यह काम ओडिसा के पिपली इलाके के लोग ही करते हैं, जो कि देवी-देवताओं के कपड़ों को सुई-धागे से सिलते हैं।

नोटः आपको बता दें कि इन रथों का निर्माण लोहे की कील के बिना किया जाता है। रथ में लगी लकड़ियों को आपस में जोड़कर भारी-भरकम स्ट्रक्चर तैयार किया जाता है।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jul 14, 2026, 17:51 IST

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