भारत की वह नहर, जिसने देश को दिया था IIT Roorkee

Last Updated: Aug 29, 2026, 14:28 IST

आपने भारत में कई नहर के बारे में पढ़ा या सुना ही होगा। नहरें मैदानी इलाकों में जल स्रोत का मुखिया जरिया हैं। हालांकि, इसमें एक नहर ऐसी भी है, जिसने देश को आईआईटी रुड़की दिया था।

आईआईटी रुड़की
आईआईटी रुड़की

आपने भारत की नहरों के बारे में पढ़ा और सुना ही होगा। इनमें एक नहर ऐसी भी है, जिसने देश को IIT Roorkee जैसा प्रतिष्ठित संस्थान दिया था। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में ऐसा क्या हुआ था, जिस वजह से इस नहर का निर्माण करना पड़ा था। इस लेख में हम नहर और आईआईटी रुड़की के बनने के इतिहास और कारण को बारीकी व विस्तार से समझेंगे।

किस नहर ने दिया था IIT Roorkee

भारत में IIT Roorkee की स्थापना ऊपरी गंगा नहर की वजह से हुई थी। उस समय सिविल इंजीनियर्स के लिए इस संस्थान की स्थापना की गई थी।

क्यों बनाई गई थी ऊपरी गंगा नहर

ऊपरी गंगा नहर यानि Upper Ganges Canal के निर्माण का मुख्य कारण 1837-38 का भीषण अकाल था। मानसून के फेल होने के कारण उत्तरी भारत विशेषकर उत्तर-पश्चिम प्रांत और दोआब क्षेत्र में पड़े इस अकाल में करीब 8 लाख से अधिक लोग भुखमरी और बीमारियों से मारे गए थे।

उस दौरान फसलें पूरी तरह तबाह हो गई थीं और ब्रिटिश सरकार को लगान के नुकसान व राहत कार्यों में करोड़ों का घाटा हुआ था। 

ईस्ट इंडिया कंपनी ने किया निर्माण

अकाल के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने इस पूरे क्षेत्र को भविष्य में सूखे से बचाने और कृषि उत्पादन सुरक्षित करने के लिए गंगा नदी से नहर निकालने का फैसला किया। गंगा और यमुना नदियों के बीच का क्षेत्र (दोआब) भारत का सबसे उपजाऊ इलाका था।

ऐसे में ब्रिटिशों ने यह सोचा कि किसानों की फसलें बार-बार बर्बाद न हो, ताकि ब्रिटिश सरकार को कृषि लगान समय पर मिलता रहे। वहीं, सिंचाई के साथ-साथ इसका उपयोग माल ढुलाई और व्यापार के लिए कानपुर तक नाव के लिए इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई थी।

कब हुआ नहर का निर्माण 

ऊपरी गंगा नहर का सर्वे और निर्माण ब्रिटिश इंजीनियर सर प्रोबी थॉमस कॉटले की देखरेख में किया गया था। 1842 में शुरू हुआ निर्माण कार्य 1854 में खत्म हुआ। यह नहर हरिद्वारसे गंगा नदी के दाहिने तट से निकाली गई है।

रुड़की में सोलानी नदी के ऊपर से गुजरती है नहर

आपको बता दें कि रुड़की में इस नहर को सोलानी नदी के ऊपर से गुजारा गया है। उस दौरान इस नहर के निर्माण में मिट्टी और ईंट ढोने के लिए 1851 में भारत की पहली मालगाड़ी भी चलाई गई थी, जो कि एक स्टीम इंजन से चलती थी। यह मालगाड़ी रुड़की से पिरान कलियर तक चलाई गई थी।

IIT Roorkee की हुई थी स्थापना

नहर निर्माण के दौरान इंजीनियर्स को तकनीकी जानकारी भी चाहिए थी। इसके लिए रुड़की में 1847 में थॉमसन कॉलेज ऑफ सिविल इंजीनियरिंग की स्थापना की गई, जो कि आज IIT Roorkee नाम से जाना जाता है।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Aug 29, 2026, 14:28 IST

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