भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें कई भव्य किले देखने और पढ़ने को मिलते हैं। इन किलों से जुड़ी कई प्रमुख किस्से और कहानियां हैं, जो कि यहां आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। यही वजह है कि कुछ किलों को उनकी विशेषताओं की वजह से भी जाना जाता है। आपने भारत के अलग-अलग किलों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में एक किला ऐसा भी है, जिसे ‘किलों का रत्न’ भी कहा जाता है। कौन-सा है यह किला, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
किस किले को कहा जाता है ‘किलों का रत्न’
सबसे पहले हम उस किले का नाम जान लेते हैं, जिसे ‘किलों का रत्न’ भी कहा जाता है। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित ग्वालियर के किले को ‘किलों का रत्न’ भी कहा जाता है।
किसने दी थी यह उपाधि
ग्वालियर के किले को यह उपाधि भारत में मुगल सम्राज्य की स्थापना करने वाले बाबर ने दी थी। बाबर ने किले की भव्यता को देखा और इस किले को हिंद के किलों के हार का मोती कहा था। इसके बाद ग्वालियर का किला और भी प्रसिद्ध हो गया था।
क्यों कहा जाता है ‘किलों का रत्न’
ग्वालियर के किले को ‘किलों का रत्न’ कहने के पीछे कई कारण हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
खड़ी पहाड़ी पर बना है किला
ग्वालियर का किला विंध्य पर्वत श्रेणी की गोपाचल पहाड़ी पर बना हुआ है। इस किले का निर्माण 8वीं शताब्दी में राजा सूरजसेन द्वारा करवाया गया था। किले की ऊंचाई जमीन से 300 फीट ऊपर है। ऐसे में किले पर हमला करना बहुत ही मुश्किल था। इस वजह से इस किले को अभेद्य किला माना जाता था।
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किले में वास्तुकला पर दिया गया है ध्यान
भारत में अमूमन सभी किले लाल बलुआ पत्थर या धूसर पत्थर से बने होते हैं, जबकि इस किले में हमें पत्थरों पर लाल, नीली, हरी और पीली रंग की टाइलों का उपयोग देखने को मिलता है। इन टाइल्स में अलग-अलग कृतियां बनी हुई हैं और आज भी इन टाइल्स की चमक फीकी नहीं पड़ी है।
किले में मिलता है शून्य का सबसे पुराना प्रमाण
आपको बता दें कि किले के अंदर मौजूद एक मंदिर के शिलालेख पर शून्य लिखा होने का प्रमाण मिलता है। यह शिलालेख 9वीं शताब्दी का है, जो कि शून्य का सबसे पुराना प्रमाण माना जाता है। वहीं, इस किले में एक तेली मंदिर भी है, जिसका निर्माण उत्तर भारत की नागर शैली में किया गया है। साथ ही, यहां सांस-बहू मंदिर भी है, जो कि द्रविड़ शैली में बना हुआ है। आपको बता दें कि किले में पाल, तोमर, मुगल, मराठा और ब्रिटिश का शासन रहा है।
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