मध्यप्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड (MPSOS) के छात्रों के लिए एक बेहद जरूरी चेतावनी जारी की गई है। हाल के दिनों में कई छात्रों और पेरेंट्स ने शिकायत की है कि उन्हें अनजान नंबरों से फोन आ रहे हैं, जिसमें दावा किया जा रहा है कि वे बोर्ड ऑफिस से बोल रहे हैं। ये ठग छात्रों को फेल होने का डर दिखाकर, पैसे के बदले नंबर बढ़ाने या पास कराने का झांसा दे रहे हैं।
कैसे हो रहा है यह खेल?
साइबर अपराधी छात्रों का डेटा कहीं से हासिल कर लेते हैं। इसके बाद वे सीधे पेरेंट्स को फोन करते हैं और कहते हैं "आपका बच्चा एक सब्जेक्ट में फेल हो रहा है, अगर अभी 2000-5000 रुपये जमा करेंगे, तो हम सिस्टम में नंबर बढ़ा देंगे।" घबराहट में कई लोग इन ठगों के जाल में फंस जाते हैं।
ठगों के झांसे को कैसे पहचानें?
पेरेंट्स और छात्र नीचे दी गई टेबल से असली और नकली के बीच का फर्क समझे।
| स्थिति | ठगों का तरीका | बोर्ड की असली प्रक्रिया |
| संपर्क का माध्यम | व्हाट्सएप या अज्ञात नंबर से कॉल | बोर्ड कभी भी किसी छात्र को व्यक्तिगत कॉल नहीं करता |
| पैसे की मांग | गूगल पे या फोन पे पर पैसे मांगना | सभी फीस केवल आधिकारिक पोर्टल (MP Online) पर जमा होती है |
| धमकी/लालच | "अभी पैसे नहीं दिए तो रिजल्ट फेल आएगा" | रिजल्ट पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी होता है |
| दस्तावेज | फर्जी मार्कशीट की फोटो भेजना | मार्कशीट केवल स्कूल या बोर्ड ऑफिस से मिलती है |
अपने पैसे को कैसे बचाएं?
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आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें
किसी भी जानकारी, रिजल्ट या फीस के लिए केवल mpsos.nic.in पर ही जाएं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।
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बैंक डिटेल्स कभी साझा न करें
बोर्ड का कोई भी अधिकारी आपसे कभी भी बैंक खाता नंबर, OTP या UPI PIN नहीं मांगेगा। यदि कोई ऐसा करता है, तो तुरंत फोन काट दें।
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स्कूल प्रबंधन से संपर्क करें
यदि आपको कोई संदिग्ध कॉल आता है, तो तुरंत अपने संबंधित स्कूल के प्राचार्य या ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से बात करें।
शिकायत कहां दर्ज करें?
यदि आप या आपके जान-पहचान में कोई इस ठगी का शिकार हुआ है, तो चुप न रहें। इन माध्यमों से मदद लें:
- साइबर हेल्पलाइन नंबर: 1930 (तत्काल कॉल करें)
- ऑनलाइन शिकायत: cybercrime.gov.in पर जाकर रिपोर्ट करें।
- बोर्ड हेल्पलाइन: MPSOS की आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए हेल्पलाइन नंबरों पर सूचना दें।
बोर्ड का संदेश: "छात्रों की मेहनत ही उनका परिणाम तय करती है। पैसे देकर नंबर बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे किसी भी झांसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई बर्बाद न करें।"
पेरेंट्स के लिए विशेष सलाह
अपने बच्चों को एग्जाम के रिजल्ट के प्रति सहज रखें। फेल होने के डर से ही पेरेंट्स जल्दबाजी में ठगों को पैसे दे देते हैं। याद रखें, 'रुक जाना नहीं' जैसी योजनाएं छात्रों को दोबारा मौका देने के लिए ही बनाई गई हैं।

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