ग्लेशियर एक्सप्रेस (Glacier Express) को 2026 में भी दुनिया की सबसे धीमी एक्सप्रेस ट्रेन माना जाता है। यह स्विट्ज़रलैंड के खूबसूरत आल्प्स पहाड़ों के बीच 291 किमी का सफर तय करती है। जेरमैट (Zermatt) से सेंट मॉरिट्ज (St. Moritz) तक की यह यात्रा लगभग 8 से 10 घंटे में पूरी होती है, जिसकी औसत रफ्तार करीब 36 किमी/घंटा है। जिस कारण इसे दुनिया की सबसे धीमी ट्रेन के दर्जे में शुमार किया जाता है।
91 सुरंगों और 291 पुलों से गुजरती है यह ट्रेन
World’s Slowest Train:यह ट्रेन संकरी पटरियों पर चलती है, जहां तेज गति संभव नहीं है। सफर के दौरान यह 91 सुरंगों और 291 पुलों से गुजरती है, जिनमें ऊंचे वायाडक्ट और घुमावदार टनल शामिल हैं। ट्रेन 2,033 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचती है, जो इसे इंजीनियरिंग का शानदार नमूना बनाती है।
रास्ते के खास नजारे
यात्रा की शुरुआत Matterhorn के पास बसे जेरमैट (Zermatt) से होती है। यह ट्रेन रौन घाटी ओबेराल्प दर्रा और राइन गॉर्ज जैसे खूबसूरत स्थानों से गुजरती है, जिसे यूरोप का “ग्रैंड कैन्यन” कहा जाता है। आगे यह Engadine Valley होते हुए सेंट मॉरिट्ज पहुंचती है।
क्यों है इतनी कम रफ्तार?
ग्लेशियर एक्सप्रेस की धीमी गति ही इसकी खासियत है। तेज रफ्तार ट्रेनों जैसे Shinkansen के विपरीत, यह ट्रेन यात्रियों को प्राकृतिक सुंदरता का पूरा आनंद लेने का मौका देती है। पहाड़ी रास्तों, तीखे मोड़ों और सुरक्षा कारणों से इसकी गति कम रखी जाती है।
यात्रियों का अनुभव
इस ट्रेन में लग्जरी “Excellence Class” से लेकर सामान्य श्रेणी तक विकल्प उपलब्ध हैं। यात्री सफर के दौरान स्वादिष्ट भोजन, क्षेत्रीय वाइन और पैनोरमिक कोच से 360-डिग्री नजारे का आनंद लेते हैं। ऑडियो गाइड कई भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे यात्रा और भी दिलचस्प बन जाती है।
कब हुई थी इसकी शुरुआत
1930 में शुरू हुई यह ट्रेन आज भी पर्यटकों की पसंद बनी हुई है। 2026 में इसमें नए कोच, बेहतर सीटिंग और डिजिटल इंफोटेनमेंट सिस्टम जोड़े गए हैं। भविष्य में हाइब्रिड इंजन जैसे पर्यावरण-अनुकूल बदलाव की भी योजना है, जिससे इसकी विरासत और मजबूत होगी।