आज हम भारत का नक्शा उठाकर देखते हैं, तो हम आसानी से नक्शे में भारत के भूगोल को समझ लेते हैं। हालांकि, एक समय था, जब यह नक्शा हमारे पास नहीं था। उस समय भारत के नक्शे को समझने में बहुत मुश्किल होती थी। वर्तमान में भारत का जो नक्शा हमारे पास है, वह किसी एक व्यक्ति ने नहीं बनाया था, बल्कि इसके पीछे तीन अधिकारियों के नाम सामने आते हैं।
यह हैं भारतीय भूगोल के पिता
आपको बता दें कि आधुनिक भारतीय भूगोल के पिता के रूप में जेम्स रेननेल को जाना जाता है। साल 1767 में क्लाइव द्वारा रेननेल को पहला सर्वेयर जनरल नियुक्त किया गया था। इनके द्वारा बंगाल और इसके आसपास का नक्शा तैयार किया गया था।
विलियम लैम्बटन ने की ट्रिगोनोमेट्रिकल सर्वे की शुरुआत
साल 1802 में भारत ट्रिगोनोमेट्रिकल सर्वे की शुरुआत का श्रेय विलियम लैम्बटन को दिया जाता है। इसके तहत गणनाओं के आधार पर कन्याकुमारी से हिमालय तक की दूरी और अक्षांश-देशांतर को मापा गया था।
जॉर्ज एवरेस्ट ने दिया अंतिम रूप
विलियम लैम्बटन की मृत्यु के बाद यह काम लटक गया था। हालांकि, उनके सहायक जॉर्ज एवरेस्ट ने इस काम को संभाला और वर्तमान का भारतीय नक्शा तैयार किया। इनकी टीम ने ही माउंट एवरेस्ट की सटीक ऊंचाई मापी थी, जिसके बाद उनके सम्मान में इस पर्वत को माउंट एवरेस्ट नाम दिया गया। हालांकि, एवरेस्ट की ऊंचाई को लेकर पहले मापने का दावा राधानाथ सिकदार नाम के गणितज्ञ का भी रहा है।
सर्वे में इस मशीन का हुआ था उपयोग
आपको बता दें कि उस समय भारत को मापने के लिए थियोडोलाइट नाम की मशीन का उपयोग किया गया था। इस मशीन का वजन बहुत अधिक था, जिसे हाथियों की मदद से खिंचवाया जाता था। यह मशीन एक निश्चित दूरी पर दो बिंदुओं के बीच हॉरिजोंटल, वर्टिकल और एंगल को मापती थी।
लोहे की जंजीर होती थी इस्तेमाल
इस काम में सर्वेक्षकों को एक बेस लाइन भी नापनी होती थी, जिससे वर्टिकल्स और एंगल्स लिए जाते थे। इस बेस लाइन को मापने के लिए 100 फीट लंबी लोहे की जंजीर हुआ करती थी। सर्दी और गर्मी में लोहा सिकुड़े और फैले नहीं, इसके लिए जंजीर को एक शीशे के बॉक्स में रखा जाता था।
चुनौतियों का करना पड़ा सामना
जिस समय भारत को मापने का काम चल रहा था, उस समय कई चुनौतियां भी थीं। अंग्रेज मशीन को रखने के लिए किसी ऊंचे स्थान को ढूंढते थे। इस दौरान कई बार बड़ी मचान भी बनाई जाती थी। वहीं, अधिक परेशानी जंगलों में होती थी, क्योंकि जंगली जानवरों के हमले का खतरा बना रहता था। दूसरी तरफ, गांव-देहात के लोग थियोडोलाइट मशीन को एक बड़ी बंदूक की तरह समझते थे और इससे डरते थे।
पढ़ेःं भारत में किस शहर को कहा जाता है ‘गजक का शहर’, जानें नाम और स्थान
पढेंः भारत की सबसे पुरानी नदी कौन-सी है, जानें नाम
Comments
All Comments (0)
Join the conversation