भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें कई महत्त्वपूर्ण लड़ाइयां देखने को मिलती हैं। इन लड़ाइयों को लेकर अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सवाल पूछे जाते हैं। इसमें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सबसे पसंदीदा टॉपिक मुगल काल रहा है। मुगल काल के दौरान कई महत्त्वपूर्ण लड़ाई हुई हैं, जिनमें से एक सामूगढ़ की लड़ाई(Battle of Samugarh) रही है। इतिहासकार इस लड़ाई को मुगल काल का निर्णायक मोड़ मानते हैं, क्योंकि यह लड़ाई शाहजहां के बेटों के बीच उत्तराधिकार को लेकर थी। इसमें एक तरफ उदारवादी सोच और दूसरी तरफ धार्मिक कट्टरता और कुशल रणनीति थी।
कब और किसके बीच हुई थी सामूगढ़ की लड़ाई
सामूगढ़ की लड़ाई मई, 1658 में हुई थी। उस समय जब औरंगजेब अपने भाई मुराद बख्स के साथ आगरा की तरफ बढ़ रहा था, तो उनके भाई दारा शिकोह ने दोनों भाइयों का रास्ता रोक दिया। इस दौरान दारा के पास करीब 60 हजार सैनिक थे, जबकि औरंगजेब के पास 30 से 40 हजार सैनिक थे। दारा शिकोह की ओर से सेना का नेतृत्व राव सत्तरसाल कर रहे थे, जो कि एक राजपूत राजा थे।
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किसके हुई जीत
सामूगढ़ की लड़ाई में दोनों तरफ से सेनाओं के बीच भीषण युद्ध चला। इस दौरान दारा शिकोह अपने हाथी पर सवार हो कर युद्ध लड़ रहे थे। हालांकि, इतिहासकार मानते हैं कि उन्होंने लड़ाई के दौरान हाथी से उतकर घोड़े पर सवार होना ठीक समझा, जो कि एक बड़ी गलती हुई। इस वजह से उनका हाथी का हौदा खाली हो गया, जिससे दारा की सेना को लगा कि बादशाह मारा गया है।
ऐसे में सेना में भगदड़ मच गई, जिसका फायदा औरंगजेब की सेना को हुआ और उसने सेना को हरा दिया। इस युद्ध में दारा शिकोह भागकर दिल्ली आ गया था।
सामूगढ़ जीतने के बाद शाहजहां को किया कैद
यदि इतिहास में और पीछे देखें, तो हमें देखने को मिलता है। सामूगढ़ की लड़ाई के बाद औरंगजेब ने आगरा किले का रूख किया, लेकिन उनके पिता शाहजहां ने उनके लिए किले के दरवाजे नहीं खोले। इस पर नाराज होकर औरंगजेब ने यमुना नदी से किले के अंदर जाने वाली पानी की सप्लाई के सभी रास्ते बंद कर दिए थे। मई-जून की गर्मी में पानी की कमी से शाहजहां को मजबूर होना पड़ा और उन्होंने किले के दरवाजे खोल दिए।
हालांकि, किले में प्रवेश करने पर औरंगजेब ने अपने पिता शाहजहां को मुस्म्मन बुर्ज में नजरबंद कर दिया था। यहां 1666 में शाहजहां की मृत्यु हो गई थी। सामूगढ़ की लड़ाई के बाद ही औरंगजेब ने दिल्ली के शालीमार बाग में खुद को ‘आलमगीर’ घोषित कर दिया था।
आज इस नाम से जाना जाता है सामूगढ़
सामूगढ़ इलाका आगरा से पूर्व की दिशा में करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर है। औरंगजेब ने इस स्थान पर जीत हासिल करने के बाद इस जगह का नाम बदलकर फतेहाबाद कर दिया था। मुगल सम्राट द्वारा यहां एक शाही बाग और मस्जिद भी बनवाई गई थी। इस बाग के चारों ओर चार प्रवेश द्वार हुआ करते थे, जिनमें से आज एक ही द्वार बचा है, जो कि फतेहाबाद तहसील का मुख्य प्रवेश द्वार भी है।
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