कितनी है अयोध्या राम मंदिर की उम्र, विशेषज्ञों ने किस तकनीक से किया है तैयार
अयोध्या का राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर का निर्माण प्रसिद्ध नागर शैली में किया गया है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि राम मंदिर की उम्र कितनी है और इसके निर्माण में किस तकनीक का उपयोग किया गया है ? यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
अयोध्या का राम मंदिर भारत के सबसे बड़े प्रमुख मंदिरों में शामिल है। यह मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में देशी-विदेशी सैलानी राम मंदिर पहुंचते हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि राम मंदिर की उम्र कितनी है और इसके निर्माण में किस तकनीक का उपयोग किया गया है ? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
नागर शैली में हुआ है राम मंदिर का निर्माण
अयोध्या राम मंदिर का निर्माण नागर शैली में किया गया है, जो कि उत्तर भारत की प्राचीन मंदिर निर्माण शैली है। इस शैली का उदय 5 ईसा पूर्व शताब्दी में गुप्त काल के अंतिम चरण में उत्तर भारत में हुआ था। नागर शैली में एक बड़े चबूतरे पर गर्भगृह बनाने के साथ-साथ प्रदक्षिणा पथ और मंदिर के आगे मंडप बनाए जाते हैं। इस शैली में गर्भगृह के ऊपर एक शिखर का निर्माण किया जाता है।
किस कंपनी ने किया है मंदिर का निर्माण
राम मंदिर का निर्माण प्रसिद्ध निर्माण कंपनी लार्सन एंड टुब्रो(L&T) द्वारा किया गया है। वहीं, कंपनी के बुनियादी ढांचे की देखरेख और सुझाव टाटा कंसल्टेंसी सर्विस(TCS) की देखरेख में हुआ है। मंदिर के निर्माण में IITs के विशेषज्ञों ने भी तकनीकी रूप से सहयोग किया है।
कितनी है राम मंदिर की उम्र
राम मंदिर का निर्माण प्राकृतिक आपदाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है। ऐसे में विशेषज्ञों ने मंदिर को इस प्रकार बनाया है कि यह बड़े-बड़े से भूकंप के झटकों को आसानी से झेल सकता है। वहीं, मंदिर का निर्माण एक बड़े चबूतरे पर किया गया है, जिससे यह बाढ़ से भी सुरक्षित रहेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस मंदिर की उम्र 1000 साल से भी अधिक है। ऐसे में वर्तमान में बना मंदिर भविष्य के पन्नों में अतीत की छाप छोड़ेगा।
राम मंदिर निर्माण में इस तकनीक का हुआ इस्तेमाल
राम मंदिर का निर्माण पारंपरिक रूप से किया गया है। इसके तहत मंदिर निर्माण में किसी भी प्रकार का लोहा या सीमेंट नहीं लगा है, बल्कि पत्थरों के बड़े-बड़े ब्लॉक को इंटरलॉकिंग तकनीक से जोड़ा गया है। इससे भारी-भरकम ब्लॉक इंटरलॉक के माध्यम से मजबूती से पकड़ बनाए रखते हैं।
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