Rafale Jets India France Deal in Hindi: भारतीय वायुसेना की ताकत में एक बार फिर बड़ा इजाफा होने जा रहा है। भारत फ्रांस के साथ एक अहम रक्षा सौदे की ओर बढ़ रहा है, जिसके तहत 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी मिल चुकी है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने करीब ₹3.25 लाख करोड़ के इस प्रस्ताव को Acceptance of Necessity (AoN) दे दिया है। यह फैसला फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा से पहले लिया गया है, जिससे डील को अंतिम रूप मिलने की संभावनाएं तेज हो गई हैं।
राफेल भारत में होगा असेंबल:
इस योजना के अनुसार 18 राफेल विमान सीधे फ्रांस से तैयार हालत में खरीदे जाएंगे, जबकि बाकी 96 विमानों को भारत में असेंबल और निर्मित किया जाएगा। इससे ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा और देश में रक्षा उत्पादन क्षमता मजबूत होगी। यह सौदा भारतीय वायुसेना के लिए अब तक के सबसे बड़े लड़ाकू विमान सौदों में से एक माना जा रहा है, जो स्क्वाड्रन की कमी दूर करने में अहम भूमिका निभाएगा।
क्या है डील की टाइमलाइन:
इस प्रस्ताव के तहत 18 राफेल विमान सीधे फ्रांस से खरीदे जाएंगे, जबकि बाकी 96 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इनमें ट्रेनिंग के लिए ट्विन-सीटर जेट भी शामिल होंगे। यह योजना ‘मेक इन इंडिया’ के तहत होगी, जिसमें तकनीक हस्तांतरण और करीब 60% स्वदेशी सामग्री के उपयोग पर जोर रहेगा। अगला कदम कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी है।
वायुसेना के लिए रणनीतिक बढ़त
फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल जेट हैं, जो दो स्क्वाड्रन में तैनात हैं। इन विमानों ने हालिया अभियानों में SCALP क्रूज मिसाइल और Meteor मिसाइलों के साथ अपनी क्षमता साबित की है। 114 नए राफेल शामिल होने से स्क्वाड्रन की कमी दूर होगी और पाकिस्तान व चीन जैसी चुनौतियों के मुकाबले वायुसेना और मजबूत बनेगी।
Defence Acquisition Council, under the chairmanship of Raksha Mantri Rajnath Singh, accorded Acceptance of Necessity (AoN) for various proposals of the Services at an estimated value of about Rs 3.60 lakh crore, on February 12, 2026. For the Indian Air Force (IAF), AoN was…
— ANI (@ANI) February 12, 2026
मेक इन इंडिया और स्वदेशी निर्माण
राफेल निर्माण में भारत की बड़ी भूमिका होगी। डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स जैसी कंपनियों की साझेदारी से हैदराबाद में उत्पादन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। 2028 से फ्यूजलेज और अन्य हिस्सों का निर्माण शुरू होने की संभावना है। इसके साथ में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO), लॉजिस्टिक्स और ट्रेनिंग सपोर्ट भी शामिल रहेगा।
राफेल की क्या है ताकत
राफेल एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो एयर सुपीरियॉरिटी, ग्राउंड अटैक और टोही मिशन में सक्षम है। इसमें SCALP क्रूज मिसाइल (250+ किमी), Meteor एयर-टू-एयर मिसाइल और HAMMER स्टैंड-ऑफ हथियार लगाए जाते हैं। साथ ही Spectra इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, एडवांस रडार और टार्गेटिंग पॉड इसे बेहद घातक बनाते हैं।
| फीचर | डिटेल्स |
| हथियार | SCALP क्रूज मिसाइल (250+ किमी रेंज), Meteor एयर-टू-एयर मिसाइल, HAMMER स्टैंड-ऑफ हथियार |
| सिस्टम | Spectra इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, एडवांस रडार, आधुनिक टार्गेटिंग पॉड्स |
| वेरिएंट | IAF के लिए F3-R प्लस (13 भारत-विशेष सुधार), नौसेना के लिए ‘M’ वर्जन |
| रोल | मल्टी-रोल: एयर सुपीरियॉरिटी, ग्राउंड अटैक, रिकॉनिसेंस |
नौसेना के लिए भी प्लान तैयार:
वायुसेना की यह डील नौसेना के लिए प्रस्तावित 26 राफेल-एम जेट्स के ऑर्डर से भी जुड़ी है, जिनकी लागत करीब ₹63,000 करोड़ है। ये जेट INS विक्रांत और विक्रमादित्य जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर से ऑपरेट करेंगे। दोनों सौदों को मिलाकर भारत के पास कुल राफेल विमानों की संख्या लगभग 176 तक पहुंच सकती है, जो देश की रक्षा क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
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