अंग्रेजों के समय क्या था ‘सूर्यास्त कानून’, जानें यहां

Jan 13, 2026, 17:31 IST

अंग्रेजों के समय लागू 'सूर्यास्त कानून' एक महत्वपूर्ण भू-राजस्व कानून था। यह स्थायी बंदोबस्त के तहत जमींदारों पर लागू होता था। यदि जमींदार सूर्यास्त तक निर्धारित लगान जमा नहीं कर पाते थे, तो उनकी जमींदारी छीन ली जाती थी। इस कानून का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के लिए राजस्व संग्रह सुनिश्चित करना था, लेकिन इसने कई जमींदारों को प्रभावित किया।

क्या था सूर्यास्त कानून
क्या था सूर्यास्त कानून

यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो आपको भारत का आधुनिक इतिहास पढ़ना ही होगा। आधुनिक इतिहास में आपको भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष देखने को मिलता है। इस दौरान अंग्रेजों ने अपने शासन के दौरान भारत में कई व्यवस्थाएं लागू की थीं, जिनमें से एक ‘स्थायी बंदोबस्त’ व्यवस्था थी, जिसमें सूर्यास्त कानून भी था।

यह व्यवस्था कृषि से जुड़ी होने के साथ जमीन से भी जुड़ी हुई थी। इस व्यवस्था में सूर्यास्त कानून बहुत ही महत्त्वपूर्ण माना जाता है। क्या थी यह पूरी व्यवस्था, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।  

कब लागू हुई स्थायी बंदोबस्त(Permanent Settlement) व्यवस्था

भारत में स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था को ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा 22 मार्च, 1793 में लागू किया था। इस व्यवस्था को उस समय बंगाल के गवर्नर जनरल कॉर्नवालिस द्वारा लागू किया था। यह एक प्रकार की भू-राजस्व प्रणाली हुआ करती थी। कुछ लेखों में इसे जमींदारी प्रथा के नाम से भी जाना जाता है।

क्यों लागू हुई थी जमींदारी प्रथा

जमींदारी प्रथा से पहले अंग्रेजों द्वारा टैक्स की बोली लगाई जाती थी। इससे अंग्रेजों को एक निश्चित आय नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में कार्नवालिस ऐसी व्यवस्था चाहता था, जिससे कंपनी को एक निश्चित आय मिलती रहे। साथ ही, एक ऐसा जमींदार वर्ग मिले, जो कि अंग्रेजों के समर्थन में हो।

क्या थी स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था

स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था में जमींदारों को जमीन का मालिक बना दिया जाता था। वे जमीन को बेचने व गिरवी रखने का अधिकार रखते थे। कंपनी ने यह वादा किया था कि वह निर्धारित लगान से अधिक शुल्क नहीं लेगी।

क्या था सूर्यास्त कानून

सूर्यास्त कानून इस प्रणाली का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है। इसके तहत यदि जमींदार द्वारा तय तिथि के सूर्यास्त तक ब्रिटिश को पैसा नहीं मिलता था, तो उसकी जमींदारी जब्त कर नीलाम हो जाती थी।

कैसे होता था राजस्व का विभाजन

उस समय राजस्व को कुल 11 भागों में बांटा गया था। इसमें कुल राजस्व का 10/11 हिस्सा कंपनी के पास भेजा जाता था, जबकि 1/11 हिस्सा जमींदारों के पास रहता था।

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किसे क्या फायदा और क्या नुकसान हुआ

जमींदारी सिस्टम से ब्रिटिश को आय का रेगुलर स्रोत मिल गया था, जिससे ब्रिटिश को राजस्व पहुंचता था। वहीं, जमींदारों को भी इससे फायदा था, क्योंकि बाद में कृषि बढ़ने पर अधिक लगान मिलता था, लेकिन जमींदार एक निश्चित मात्रा में ही ब्रिटिश को यह लगान जमा करवाते थे। दूसरी तरफ, इससे सबसे अधिक नुकसान किसानों का हुआ।

किसानों का अपनी जमीन पर कोई हक नहीं रहा, वे सिर्फ खेती करते और लगान देते थे। वहीं, लगान न देने की स्थिति में किसानों को उनकी जमीन से बेदखल कर दिया जाता था।

भारत में कहां लागू थी स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था

भारत में मुख्य रूप से बंगाल, बिहार और ओडिसा में स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था लागू थी। हालांकि, उत्तर प्रदेश के वाराणसी के कुछ भागों और उत्तरी कर्नाटक में भी इसे लागू किया गया था। बाद में ब्रिटिश को जब अहसास हुआ कि फसलों की पैदावर बढ़ी है, लेकिन उन्हें पुरानी तय दरों पर ही लगान मिल रहा है, तो यह व्यवस्था बंद कर दी गई।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior content writer

A seasoned journalist with over 7 years of extensive experience across both print and digital media, skilled in crafting engaging and informative multimedia content for diverse audiences. His expertise lies in transforming complex ideas into clear, compelling narratives that resonate with readers across various platforms. At Jagran Josh, Kishan works as a Senior Content Writer (Multimedia Producer) in the GK section. He writes on national and international topics from a GK perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com

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