यूपी के किस जिले को कहा जाता है ‘भारत का एथेंस’ और क्यों ? जानें यहां

Last Updated: Jun 10, 2026, 16:40 IST

उत्तर प्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है, जो कि 240,928 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। भारत का यह राज्य अपनी विविध संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। यहां का एक जिला ऐसा भी है, जिसे ‘भारत का एथेंस’ भी कहा जाता है।

उत्तर प्रदेश
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उत्तर प्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है, जो कि 240,928 वर्ग किलोमीटर के साथ देश के करीब 7.5 फीसदी हिस्से में है। यह राज्य अपने संस्कृति, कला और इतिहास के लिए विश्व विख्यात है। यही वजह है कि यहां के प्रत्येक जिले की अपनी एक पहचान है। इस कड़ी में यूपी का एक जिला ऐसा भी है, जिसे ‘भारत का एथेंस’ भी कहा जाता है। कौन-सा है यह जिला और क्या है इसके पीछे का कारण, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।

किस जिले को कहा जाता है ‘भारत का एथेंस’

सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि यूपी के किस जिले को ‘भारत का एथेंस’ भी कहा जाता है। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले, जिसे काशी के नाम से भी जाना जाता है, इसे ‘भारत का एथेंस’ भी कहा जाता है।

किसने कहा था ‘भारत का एथेंस’?

काशी को ‘भारत का एथेंस’ 17वीं शताब्दी में प्रसिद्ध फ्रांसीसी यात्री फ्रांस्वा बर्नियर द्वारा कहा गया था। बर्नियर मुगल सम्राट शाहजहां और औरंगजेब के शासनकाल में भारत में थे। इसे लेकर उन्होंने अपनी किताब 'ट्रैवेल्स इन द मुगल एम्पायर' भी लिखी है, जिसमें उन्होंनेकाशी का वर्णन करते हुए इसे "भारत का एथेंस" कहा था, जहां देश भर से लोग ज्ञान और दर्शन की शिक्षा लेने आते हैं।

काशी को 'भारत का एथेंस' क्यों कहा जाता है?

अब सवाल है आखिर काशी को ही ‘भारत का एथेंस’ क्यों कहा जाात है ? दरअसल, यूनान की राजधानी एथेंस, पश्चिमी दुनिया में ज्ञान, दर्शन, लोकतंत्रा, कला और विज्ञान का सबसे बड़ा केंद्र थी। महान दार्शनिकों में शामिल सुकरात, प्लेटो और अरस्तू ने भी इस जगह काम किया था। ऐसे में पूर्वी दुनिया और भारत में काशी की भी स्थिति कुछ ऐसी ही थी। 

ज्ञान और दर्शन का केंद्र बनी काशी

काशी शुरू से ही सनातन धर्म, वेद, उपनिषद्, संस्कृत और व्याकरण की शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। एक समय भारत में यह कहा जाता था कि कोई भी दार्शनिक सिद्धांत तब तक पूरा नहीं होता था, जब तक उसे काशी के विद्वानों द्वारा मान्यता या शास्त्रार्थ में स्वीकृति न मिले। 

बर्नियर ने किया था खुला विश्वविद्यालय का उल्लेख

फ्रांस्वा बर्नियर ने अपने लेख में इस बात का जिक्र किया था कि काशी में यूरोप के विश्वविद्यालयों की तरह कोई एक बड़ा केंद्रीय स्थल नहीं था, बल्कि यह पूरा शहर ही अपने आप में एक खुला विश्वविद्यालय था। यहां की गलियों, घाटों, मंदिर और मस्जिदों में छोटे-छोटे मदरसे, स्कूल और आश्रम थे, जो कि शिक्षा का केंद्र थे। यहां देश-विदेश से छात्र ज्ञान के लिए पहुंचते थे।

धर्मों का संगम स्थल रहा है काशी 

काशी एथेंस की तरह ही एक संप्रदाय तक सीमित नहीं रहा था। यहां हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म का संगम देखने को मिलता था। यहां स्थित सारनाथ में बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था, जबकि जैन धर्म के कई तीर्थंकरों की यह जन्मभूमि रहा है। इसके अलावा, यहां के गली-गली में मंदिर बने हुए हैं और कुछ जगहों पर मस्जिदें भी देखने को मिलती हैं।


Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jun 10, 2026, 16:40 IST

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