मलक्का स्ट्रेट के पास इस आइलैंड पर भारत बना रहा ड्यूल-यूज़ एयरपोर्ट, यह क्यों है गेमचेंजर? जानें
भारत हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए ग्रेट निकोबार द्वीप पर ड्यूल-यूज़ एयरपोर्ट विकसित कर रहा है। यह एयरपोर्ट नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होगा। मलक्का स्ट्रेट के करीब स्थित होने से यह समुद्री निगरानी, सुरक्षा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत ने ग्रेट निकोबार आइलैंड में ₹13,000 करोड़ के निवेश के साथ एक ऐसा कदम उठाया है, जो केवल एक हवाईअड्डा बनाने तक सीमित नहीं है। यह निर्णय भारत की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक रणनीतिक भूमिका को नई दिशा देने वाला है। यह द्वीप विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक मलक्का स्ट्रेट (Strait of Malacca) के बेहद करीब है, जो हिंद महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ता है और जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का व्यापार गुजरता है।
बनेगा ड्यूल-यूज़ एयरपोर्ट
ग्रेट निकोबार आइलैंड (Great Nicobar Island) पर प्रस्तावित ड्यूल-यूज़ (नागरिक + सैन्य) हवाईअड्डा ऐसा ढांचा होगा, जहां यात्री उड़ानों के साथ भारतीय नौसेना के विमान भी संचालित होंगे। यह मजबूत रनवे, एडवांस सिक्यूरिटी और अलग नेवल एन्क्लेव के जरिए रणनीतिक तथा आर्थिक दोनों जरूरतों को पूरा करेगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रोजेक्ट?
दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री “हाईवे” के पास भारत अपनी एक मजबूत मौजूदगी स्थापित कर रहा है। मलक्का जलडमरूमध्य से चीन के लगभग 75-80% ऊर्जा आयात गुजरते हैं। ऐसे में यहां भारत की निगरानी क्षमता बढ़ना, क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से बेहद अहम है। यह कदम भारत को केवल देखने वाला नहीं, बल्कि प्रभाव डालने वाला देश बनाता है।
हवाईअड्डे की खास बातें (Airport Features)
यह कोई सामान्य एयरपोर्ट नहीं होगा। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी ड्यूल-यूज़ क्षमता है।
नागरिक और सैन्य दोनों के लिए उपयोग
लंबा और मजबूत रनवे, बड़े विमानों के संचालन के लिए सक्षम
नेवी के लिए अलग एन्क्लेव (Naval Enclave)
एडवांस सर्विलांस और कम्युनिकेशन सिस्टम
बेहतर लॉजिस्टिक्स सपोर्ट, जिससे त्वरित तैनाती संभव
बढ़ेगी अंडमान और निकोबार कमांड की ताकत
यह हवाईअड्डा भारत की त्रि-सेवा कमान Andaman and Nicobar Command की क्षमता को और मजबूती देगा। जरूरत पड़ने पर यह एक फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस की तरह काम करेगा। प्रोजेक्ट को पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है, और इसकी फंडिंग रक्षा मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय मिलकर करेंगे।
सिर्फ सुरक्षा नहीं, आर्थिक मजबूती भी
ग्रेट निकोबार को एक बड़े आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की भी योजना है। गैलाथिया की खाड़ी (Galathea Bay) में एक ट्रांसशिपमेंट हब बनाया जाएगा। इसका मतलब है कि भारत को अब कंटेनर ट्रांसफर के लिए कोलंबो, दुबई और सिंगापुर जैसे विदेशी बंदरगाहों पर उतना निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे यह द्वीप एक सस्टेनेबल आर्थिक हब के रूप में उभरेगा।
मलक्का स्ट्रेट के पास होने का क्या है फायदा
मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इसके पास मौजूद एयरपोर्ट भारत को जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने, समुद्री सुरक्षा मजबूत करने, आपदा राहत अभियान चलाने और हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाने में मदद करेगा।
एक व्यापक रणनीतिक सोच
यह परियोजना केवल इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, यह भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति का हिस्सा है। आज जब समुद्री व्यापार और ऊर्जा मार्ग वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर रहे हैं, तब ग्रेट निकोबार भारत को एक मजबूत, आत्मविश्वासी और प्रभावशाली समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। सीधे शब्दों में कहें तो, यह एयरपोर्ट केवल विमानों के उतरने-उड़ने की जगह नहीं होगा, यह भारत की बढ़ती सामरिक और आर्थिक ताकत का प्रतीक बनेगा।
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